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आवाज अड्डाः कुलभूषण की फांसी पर रोक, क्या फैसला मानेगा पाकिस्तान!

प्रकाशित Thu, 18, 2017 पर 21:05  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

एक बहुत बड़ी अदालत ने फैसला सुना दिया है। सच कहें तो दुनिया की सबसे बड़ी अदालत इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस ने फैसला सुना दिया है। फैसला भारत के पक्ष में है। कुलभूषण जाधव की फांसी पर रोक लगा दी गई है। देश में जश्न का माहौल है। लेकिन साथ में एक बहुत बड़ा सवाल भी है। दुनिया की इस सबसे बड़ी अदालत का ये अख्तियार नहीं है कि वो अपना फैसला अमल में लाने के लिए किसी मुल्क को मजबूर कर सके।


पाकिस्तान का तो पूरा केस ही यही था कि ये मुकदमा सुनना ही इस अदालत के अधिकार क्षेत्र के बाहर है। फैसले के बाद भी उसने यही बात दोहराई है। लेकिन अदालत ने फिलहाल ये कहा है कि कुलभूषण की फांसी तब तक रोक कर रखी जाए जब तक इस मामले पर आखिरी फैसला नहीं हो जाता। पाकिस्तान के इस रुख से साफ है कि जाधव को सही सलामत भारत वापस लाने का रास्ता इतना आसान नहीं है। ऐसे में सवाल है कि भारत को अब कुलभूषण जाधव को सही सलामत वापस लाने के लिए क्या करना होगा? आगे के एक्शन के लिए सरकार कितनी तैयार है।


पूरा देश बेसब्री से इसी फैसले का इंतजार कर रहा था। अंतरराष्ट्रीय कोर्ट ने जाधव की फांसी रोकने का फैसला देकर पाकिस्तान के चेहरे पर करारा तमाचा मारा है। इस फैसले के साथ ही अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के सामने पाकिस्तान के झूठ की पोल खुल गुई है।


आईसीजे ने पाकिस्तान की तमाम दलीलें खारिज करते हुए आदेश दिया है कि जाधव को राजनयिक मदद मिलनी चाहिए। भारत ने कोर्ट के फैसले को अपनी जीत बताया है।


अंतरराष्ट्रीय कोर्ट के फैसले के बाद पूरे देश में जश्न मनना शुरू हो गया है। वहीं सरकार के साथ विपक्षी दलों ने कोर्ट के फैसले को हाथों हाथ लिया है। हालांकि जाधव की वापसी का रास्ता आसान नहीं है। पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाए हैं और इसे भारत का धोखा बताया है।


कुलभूषण के मामले पर भारत सरकार की दलील कि राजनयिक संबंधों के मामले में वियना संधि का उल्लंघन है। 16 बार अनुरोध के बावजूद भी राजनयिकों को मिलने नहीं दिया गया था और ना ही जाधव के परिवार वालों को मुलाकात के लिए वीजा दिया गया था। गिरफ्तारी के समय जाधव के उनके अधिकारों के बारे में नहीं बताया गया। जाधव को ईरान से गिरफ्तार करके फर्जी आरोप लगाए गए। भारत की दलील थी कि जाधव निर्दोष भारतीय हैं, जो नौसेना में नहीं हैं।


वहीं कुलभूषण के मामले पर भारत की दलीलों को खारिज करते हुए
पाकिस्तान ने दलील पेश की थी जिसके तहत राष्ट्रीय सुरक्षा के आईसीजे के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते। जाधव पर भारत की अर्जी गैरजरूरी और भ्रामक है और भारत राजनीतिक ड्रामे के लिए आईसीजे का इस्तेमाल कर रहा है।  आतंकवादी गतिविधियों में लगे जासूसों पर वियना संधि लागू नहीं होती है। जाधव को फांसी के खिलाफ अपील के लिए 150 दिन का वक्त था। जाधव के पासपोर्ट पर भारत साफ जानकारी नहीं दे रहा है।


हालांकि आईसीजे के फैसले के बाद पाकिस्तान का कहना है कि राष्ट्रहित में आईसीजे का फैसला मंजूर नहीं किया जायेगा। ये  मामला आईसीजे के बाहर का है। जाधव के खिलाफ हमारे पास ठोस सबूत है और उस सबूत को पाकिस्तान पेश करेंगे। आईसीजे ने कई अहम बातों को नजरअंदाज किया। पाकिस्तान ने आरोप लगाया है कि भारत सच छिपाना चाहता है।


गौरतलब है कि पाकिस्तान की फौजी अदालत ने कुलभूषण को 10 अप्रैल को फांसी की सजा सुनाई थी। पाकिस्तान ने कुलभूषण पर रॉ के लिए जासूसी का आरोप लगाया गया था। 3 मार्च 2016 को कुलभूषण की हुई गिरफ्तारी किया गया था।


कुलभूषण जाधव भारतीय नौ सेना के पूर्व अधिकारी हैं। साल 2002 में नौ सेना से रिटायर हो गए थे। नौ सेना छोड़ने के बाद कुलभूषण कानूनी तौर पर कारोबार कर रहे थे। जासूसी के आरोप में पाकिस्तान की जेल में हैं।


अब सवाल ये है कि क्या पाकिस्तान इस फैसले को मानेगा, क्या कुलभूषण पर मुकदमा फिर चलेगा, क्या भारत उन्हें कानूनी मदद पहुंचाने मे कामयाब हो पाएगा। और सबसे बड़ा और अहम सवाल  क्या कुलभूषण जाधव सही सलामत वापस भारत लौट पाएंगे।