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फांसी पे झूलता किसान, क्या है बेबसी की वजह!

प्रकाशित Sat, 10, 2017 पर 13:10  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

किसान आंदोलन के 10 दिन पूरे हो चुके हैं और देश के 7 राज्यों में चल रहे आंदोलन के आगे की रूपरेखा तय करने के लिए किसान महासंघ ने आज दिल्ली में आपात बैठक बुलाई है इस बैठक में संघ में शामिल 62 संगठनों के अधिकारी हिस्‍सा ले रहे हैं।


वहीं मध्य प्रदेश में किसान आंदोलन की तपिश झेल रहे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान उपवास पर बैठ गए हैं। शिवराज, भोपाल के बीएसईएल दशहरा ग्रांउड में उपवास पर बैठे हैं।  लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या शिवराज के इस कदम से प्रदेश में शांति स्थापित होगी।


उधर महाराष्ट्र में भी किसानों के अल्टीमेटम का आज आखिरी दिन है और किसानों का कहना है कि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो सोमवार से सरकारी दफ्तरों को बंद कर दिया जाएगा। आंदोलन को देखते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंत्रियों की कमिटी बनाई और ये कमिटी आज किसान संगठनों से बात करेगी। महाराष्ट्र में जारी किसान हड़ताल के बीच पिछले 24 घंटे में 4 किसान खुदकुशी कर चुके हैं ऐसे में ये बैठक काफी अहम मानी जा रही है। इस बीच महाराष्ट्र में सरकार को समर्थन दे रही शिवसेना ने कहा कि बीजेपी अगर राज्य में मध्यावधि चुनाव नहीं चाहती है तो वो किसानों का पूरा कर्ज माफ करे।


आखिर किसानों की ये स्थिति हुई क्यों? क्यों अपनी खेती के सहारे गुजर-बसर करने वाला किसान दुखी है? क्यों किसान को उस फसल की सही कीमत नहीं मिल रही, जिसे उगाने में वह अपना खून पसीना लगा देता है? सवाल कई है, लेकिन किसानों को उसके सवालों का जवाब नहीं मिल रहा। उल्टा कहीं उसे गोलियां मिल रही हैं और कहीं लाठियां। देशभर की तरह महाराष्ट्र में किसानों की स्थिति और नाजुक है। यहां जब किसान को दो वक्त की रोटी नसीब नहीं हो तो वह एक ही कदम उठाता है, और वो है मौत और इसके पीछे छोड़ जाता है बेबसी।


हद इस बात की है कि किसान किसी भी तरह फसल उगा ले तो उसे औन-पौने दाम पर ही बेचना पड़ता है। ऊपर से किसान के पास सरकारी मदद का साया तक नहीं पहुंचता। जितने रुपये का खाना किसी होटल में एक दिन में बर्बाद हो जाता है, किसानों की आमदनी महीने भर में भी उतनी नहीं होती। ले-देकर किसान 5 हजार रुपये भी नहीं कमा पाता। और किसानों के सामने खड़ा हो जाता है घर चलाने के लेकर शादी तक का संकट।