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आंत्रप्रेन्योरः इको- फ्रेंडली स्टार्टअप कॉर्नुकोपिया

प्रकाशित Sat, 10, 2017 पर 13:36  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

वेस्ट मैनेजमेंट अब सिर्फ युरोप अमेरिका जैसे देशों तक सीमित नहीं हैं भारत में भी इसी प्राथमिकता मिल रही है। यहां म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट, ई-वेस्ट, प्लास्टिक वेस्ट को रिसाइकल, रियूज का ट्रेंड बढ़ रहा है। बिजनेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन नोवोनोअस(NOVONOUS) के मुताबिक भारत का वेस्ट मैनेजमेंट मार्केट 2025 तक 13.62 बिलियन डॉलर का होगा और इस मौके को कैश कर रहे है स्टार्टअप्स। अपनी क्रिएटीविटी के दम पर कम से कम निवेश से शुरू हुआ कॉर्नुकोपिया जो फैब्रिक रिसाइकल के पुराने ट्रेंड को रिवाइव कर रहा है।


कपड़े रिसाइकल करने का ये चलन सालों से हमारे घरों में हैं। हमारी मम्मी, नानी सभी पुराने कपड़ो को पिलो कवर, रजाई के कवर बनाकर रियूज करती आ रही हैं लेकिन इस आदत को बिजनेस आइडिया में बहुत कम लोग बदल पाते हैं। तो अगर आप अपनी इस आदत को एक बिजनेस बनाना चाहते हैं और घर बैठे एक आंत्रप्रेन्योर बनना चाहते हैं तो किस तरह शुरुआत करनी चाहिए और इन बातों का ध्यान रखना चाहिए, आइए जानते हैं।


मनीषा और आएशा देसाई, इनके पास कला है पुराने कपड़ो को एक नई शक्ल देने की, जो अब इनके लिए एक बढ़िया बिजनस बन गई है। कॉर्नुकोपिया का सफर एक शौक से शुरु हुआ। फिटिंग या फैशन से बाहर होने पर कपड़े किसी काम के नहीं रहते लेकिन कपड़ों से लगाव रहता है। कपड़ो के शौकीन इस मुश्किल घड़ी से अक्सर गुजरते हैं, तो मनीषा देसाई ने इन्हीं पुराने लेकिन प्यारे कपड़ों को रजाई में ढालने की ठानी, और इसे एक स्टार्ट्अप का रूप दिया। अपनी बहन आएशा देसाई के साथ मिलकर कॉर्नुकोपिया की शुरूआत पुराने कपड़ों के बेड कवर, पिलो कवर और रजाई बनाने से हुई। जनवरी 2017 में शुरू हुआ ये स्टार्टअप पुरानी पीढ़ी की तरह कम से कम वेस्टेज करने, चीजों को रिसाइकल और रीयूज करने के सिद्धांत पर काम करता है। 


अपने ही ग्राहकों से कपड़े इकट्ठा कर उन्हें अपनी वर्कशॉप में लाया जाता है। यहां पर डिजाइनिंग से लेकर स्टिचिंग का काम होता है और नए प्रोडक्ट को वापिस ग्राहक को भेज दिया जाता है। कंपनी फिलहाल गुरुग्राम और पुणे के वर्कशॉप से काम करती है। दिल्ली, मुंबई पुणे और गुरुग्राम सेंटर से पुराने कपड़ों का कलेक्शन होता है। रिसाइकलिंग के इस कारोबार में निवेश काफी कम है और ये घर बैठे ही शुरू किया जा सकता है।


कॉर्नुकोपिया की सेल्स और मार्केटिंग उनके फेसबुक पेज से शुरू हुई। सोशल वर्क से जुड़े होने की वजह से मनीषा और आयशा का कॉन्टैक्ट नेटवर्क काफी बड़ा है। और इसका फायदा इन्होंने बिजनेस बढ़ाने के लिए किया। घर से शुरू हुआ ये स्टार्टअप आज महीने में 50-100 ऑर्डर प्रोसेस करता है। ग्राहकों तक अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए कंपनी अब फेसबुक पेज के अलावा वेबसाइट सेल पर फोकस कर रही है। कंपनी कस्टमाइज्ड प्रोडक्ट्स के साथ रेडीमेड प्रोडक्ट भी बेच रही है। जीरो वेस्ट के सिद्धांत पर काम करने वाला ये स्टार्टअप, भविष्य में फैबरिक के अलावा ग्लास और मेटल को भी अपसाइकल करने की सोच रही है।


तो अब अगर आप भी इस तरह का कुछ करना चाहते हैं, घर बैठे तो कैसे करें शुरूआत और किन बातों का रखें खयाल। ऐसे बिजनेस में भारी निवेश की जरूरत नहीं होती इसलिए कारोबार शुरू करना बेहद आसान हो जाता है। लेकिन निवेश कहां और किस तरह करें ये जांचना जरूरी है।


घर बैठे चीजें रिसाइकल करने का ये बिजनेस आइडिया जोर पकड़ रहा है।  इस बाजार में कई नए प्लेयर्स जैसे चिंदी, का-शा और कंसर्व मौजूद हैं। इस तरह के स्टार्टअप एक नया बिजनेस मॉडल पेश करने के साथ-साथ ग्रीन और क्लीन एनवायरमेंट के लिए जागरुकता भी बढ़ा रहीं है।