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जीएसटी से पहले परेशान ट्रांसपोर्टर

प्रकाशित Sat, 10, 2017 पर 14:07  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

जीएसटी लागू होते ही देश में ट्रांसपोर्टरों के लिए हर सामान और हर ट्रक के लिए एक इलेक्ट्रॉनिक बिल जेनरेट करना होगा। ट्रांसपोर्टरों को शिकायत है कि इस बिल के कारण स्पीड कम होगी और लागत बढ़ जाएगी। लिहाजा छोटे ट्रांसपोर्टरों को इससे छूट दे दी जाए।


दिल्ली के ट्रांसपोर्टर अच्छे लाल परेशान हैं ई-वे बिल पर प्रस्तावित नियमों से। उनका माल कई राज्यों में जाता है और अगर ई-वे बिल के नियम आते हैं तो उनका कागजी काम काफी बढ़ जाएगा। सरकार जीएसटी लागू होने के साथ ही ई-वे बिल के नियम लागू करना चाहती है जिससे 50000 रुपये से ज्यादा के माल के  मूवमेंट पर  सप्लायर को जानकरी जीएसटीएन पोर्टल में दर्ज करानी होगी और ई-वे बिल जनरेट करना होगा। यह बिल उन वस्तुओं के लिए भी बनाना जरूरी होगा जो जीएसटी के दायरे में नहीं आते हैं।


ट्रांसपोर्टर्स को शिकायत ई-वे बिल के कुछ नियमों से है जैसे, हर बार गाड़ी बदलते वक्त नया ई-वे बिल जनरेट करना होगा। हर कंसाइसमेंट के लिए अलग बिल होगा भले ही वो एक ट्रक से जा रहा हो और ई-वे बिल के बावजूद ड्राइवर को अपने पास सामान के इनवॉय ओर ई-वे बिल की हार्ड-कॉपी रखनी होगी। सरकार कहती है कि जीएसटी के कारण सामान तेजी से एक से दूसरी जगह पर जा पाएगा लेकिन चूंकि टैक्स अफसरों को कहीं भी गाड़ी रोककर बिल मांगने और सामान जांचने का अधिकार दिया गया है इसलिए स्पीड कम होगी और भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा मिलेगा।


ट्रांसपोर्टरों को इस बात से भी शिकायत है कि जितने राज्यों में बिजनेस होगा, उतनी जगह पर रजिस्ट्रेशन कराना पड़ेगा। इस पर भी अतिरिक्त खर्च लगेगा। ट्रांसपोर्टर चाहते हैं 5 लाख तक के सामान के लिए बिल जेनरेट करने से छुट्टी दे दी जाए। फिलहाल ये छूट सिर्फ 50 हजार तक के सामान पर है।