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शिपिंग कॉरपोरेशन को बेचने की तैयारी: सूत्र

प्रकाशित Wed, 14, 2017 पर 17:23  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सरकार शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया को बेच सकती है। सीएनबीसी-आवाज़ को सूत्रों से मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक नीति आयोग ने शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया को बेचने की सिफारिश की है। नीति आयोग का ये प्रस्ताव जल्द ही कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स यानि सीसीईए के पास भेजा जाएगा। नीति आयोग के मुताबिक सरकार शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया में हिस्सेदारी 63.75 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी तक ले आए।


विनिवेश पर बने कोर ग्रुप ऑफ सेक्रेटरी की 2 जून को हुई बैठक में शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया में हिस्सेदारी बेचने के प्रस्ताव पर चर्चा की गई। कोर ग्रुप ऑफ सेक्रेटरी ने शिपिंग मंत्रालय से कहा कि जल्द से जल्द कानूनी पहलुओं की समीक्षा करे। सूत्रों ने बताया कि नीति आयोग की सिफारिश के मुताबिक पहले चरण में सरकार शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया में अपनी 26 फीसदी हिस्सेदारी एक बार में बेचे। सरकार की फिलहाल शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया में 63.75 फीसदी हिस्सेदारी है। इस तरह 26 फीसदी हिस्सेदारी बेचने के बाद सरकार की शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया में 37.75 फीसदी हिस्सेदारी बचेगी।


सूत्रों का कहना है कि नीति आयोग ने पहले चरण की 26 फीसदी हिस्सेदारी बेचने के बाद सरकार को शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया में मैनेजमेंट कंट्रोल ट्रांसफर करने का भी प्रस्ताव दिया है। नीति आयोग के मुताबिक मैनेजमेंट कंट्रोल ट्रांसफर करने के बाद अगले 12 महीने में सरकार शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया में अलग-अलग किस्तों में हिस्सेदारी बेचकर 25 फीसदी तक ले आए।


नीति आयोग के मुताबिक सरकार को शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया को चलाने की जरूरत नहीं है। नीति आयोग ने अपनी दलील में कहा है कि शिपिंग इंडस्ट्री अब काफी कंपीटिटिव हो गई है। साथ ही देश में होने वाले कच्चे तेल के इंपोर्ट का एक छोटा हिस्सा शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया इंपोर्ट करती है। वहीं, दुनिया के अधिकांश देशों में कच्चे तेल का इंपोर्ट निजी कंपनियां करती हैं।