बच्चों में मोटापा, खतरे की घंटी! -
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बच्चों में मोटापा, खतरे की घंटी!

प्रकाशित Wed, 14, 2017 पर 18:37  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

अमेरिका की न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन की एक स्टडी बताती है कि बच्चों में ओबैसिटी यानि मोटापे के मामले में भारत दुनिया में चीन के बाद नंबर दो पर पहुंच गया है। जर्नल की स्टडी में कहा गया है कि भारत में 1 करोड़ 44 लाख बच्चे ओवरवेट यानि कि सामान्य से मोटे हैं। दुनियाभर में मोटापा किसी महामारी की तरह फैल रहा है और इसकी वजह से हजार बीमारियों के लिए दरवाजा खुल जाता है। ऐसे में सवाल है कि आखिर क्यों हमारे बच्चे मोटापा का शिकार हो रहे हैं? और हम अपने बच्चों को इस महामारी से कैसे बचाएं?


दरअसल मोटापे की सबसे बड़ी वजह है अनुवांशिक (जेनेटिक) गुण यानि ज्यादा फैट वाले जंक फूड खाने से मोटापा होता है। इस तरह के खाने में ज्यादा कार्बोहाइड्रेट होता है। हालांकि मोटापे की बड़ी वजह यह भी है कि अधिकतर लोग शुरुआती लक्षण की अनदेखी कर देते है। वहीं माता-पिता भी बच्चों के खान पान को लेकर थोड़ी लापरवाही  बरतते है। क्योंकि अधिकतर लोग मोटापे को हेल्दी बताकर उसे टालना शुरु कर देते है जिसके कारण बच्चों में मोटापे से शारीरिक गतिविधि तो कम होती ही है और बीमारी को भी न्यौता देते है। इतना ही टीवी, गैजेट की लत के कारण आउटडोर खेलों से बचने के वजह से भी मोटापा बढ़ता है। वहीं अधिकतर बच्चों में पढ़ाई के आगे खेल की उपेक्षा कर ज्यादा तनाव वाली दिनचर्या से भी भी मोटापा बढ़ता है।


बता दें कि दिल की बीमारियों की शुरुआत ही अधिक मोटापे से शुरु होती है। इससे हाई ब्लड प्रेशर, टाइप 2 डायबिटीज, गॉल स्टोन, अस्थमा, लड़कियों में पॉलीसिस्टिक ओवरी, घबराहट और तनाव, नींद में बार-बार रुकावट, आत्मविश्वास की कमी, मजाक उड़ने से निराशा होना और सामाजिक गतिविधि से हटना यह सभी मोटापे का कुप्रभाव है। 
 
इससे बचने के लिए खाने में कार्बोहाइड्रेट और फैट को घटाएं और पानी, फल, सब्जी की मात्रा बढ़ाएं। खाने-पीने की अच्छी आदत को बढ़ावा दें। पिकनिक, ट्रैकिंग जैसी आउटडोर एक्टिविटी अधिक करें। बच्चों से किचन, घर के काम में मदद करने को कह बच्चों में अनुशासन और उत्तरदायित्व लेना सिखाएं। साथ ही रुटीन में शारीरिक श्रम, खेलकूद शामिल करें ताकि वह मोटापे के शिकार ना हो। बच्चों को टीवी, मोबाइल, वीडियो गेम्स का सीमित प्रयोग करने के लिए कहें और प्लेग्राउंड, स्पोर्ट्स वाले स्कूल का चुनाव करें। बच्चे के मोटापे के लिए बच्चे को दोषी ना ठहराएं और ना ही उसकी तुलना किसी अन्य बच्चों से करें।