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आवाज अड्डाः बुकलेट पर बवाल, संस्कृति के नाम पर अवैज्ञानिक व्यवहार!

प्रकाशित Wed, 14, 2017 पर 20:49  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

अगर गर्भवती महिलाएं शाकाहारी खाना खाएं और काम वासना से दूर रहे तो उनके बच्चे सेहतमंद पैदा होंगे। ये बातें आयुष मंत्रालय की बुकलेट में लिखी गई हैं। इन पर विवाद तो होना ही था। राजनीतिक पार्टियों ने सरकार पर अवैज्ञानिकता और अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगाया है।


मां और बच्चे की सेहत से जुड़ी इस बुकलेट पर विवाद खड़ा हो गया है। आयुष मंत्रालय के तहत आने वाली संस्था सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन योगा एंड नेचुरोपैथी ने सेहतमंद बच्चे को लेकर कई सुझाव दिए हैं।


बुकलेट में कहा गया है गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को मांसाहारी खाने से दूर रहना चाहिए। साथ ही इस दौरान काम-वासना से खुद को अलग रखना चाहिए। महिलाओं को गलत सोहबत से दूर रहने और महापुरुषों की जीवनी पढ़ने की सलाह भी दी गई है।


खासकर मांस ना खाने और सेक्स से पहरेज करने की सलाह पर विवाद हो रहा है और इसमें राजनीतिक पार्टियां भी कूद गई हैं।


हालांकि विवाद के बाद आयुष मंत्रालय और बुकलेट जारी करने वाली संस्था ने सफाई दी है कि ये सिर्फ सुझाव है, इन्हें मानना जरूरी नहीं है।


आयुष मंत्रालय ने भले ही सिर्फ सुझाव दिए हों। लेकिन सवाल ये है कि शाकाहार से स्वस्थ बच्चे पैदा होने और मांसाहार से अस्वस्थ बच्चों के पैदा होने के तर्क में कितना दम है? क्या ये वैज्ञानिक और तार्किक है ? दूसरी बात ये है कि इस तरह के सुझावों से मांस खानों को बुरी नजर से भी देखा जा रहा है? क्या खानपान किसी व्यक्ति के अच्छे या बुरे होने का पैमाना हो सकता है?