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एक्सपोर्टर्स को बैंकों से राहत संभवः सूत्र

प्रकाशित Fri, 16, 2017 पर 13:33  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

बैंकों की तरफ से एक्सपोर्टर्स को जल्द राहत मिल सकती है। ये राहत कागजी कार्रवाई के मौजूदा नियमों को आसान बनाकर दी जा सकती है। इससे टैक्सटाइल्स, फूड प्रोडक्ट जैसे आइटम एक्सपोर्ट करने वालों को फायदा होगा।


बैंकों के साथ लेनदेन करना एक्सपोर्टर्स के लिए आसान हो सकता है क्योंकि वित्त मंत्रालय और रिजर्व बैंक एक्सपोर्टर्स से जुड़े नियमों में ढील देने की तैयारी में है। सबसे बड़ी राहत थर्ड पार्टी पेमेंट के मामले में मिल सकती है। अभी एक्सपोर्ट के वक्त ही बैंक को ये बताना होता है कि पेमेंट कौन करेगा। एक्सपोर्टर, कोई थर्ड पार्टी या फिर किसी तीसरे देश से आएगा। अगर ये जानकारी नहीं मिलती है तो बैंक की तरफ से कई सहूलियतें नहीं दी जाती हैं जबकि ये जानकारी शुरू में देना मुश्किल होता है।


एक्सपोर्टर्स चाहते हैं पेमेंट आने के बाद पूछा जाए कि पेमेंट कहां से आया? अभी ईरान या ईरान के रास्ते होने वाले एक्सपोर्ट को बैंक से कई जरूरी मान्यता नहीं मिलती है जिससे एक्सपोर्टर्स का खर्च बढ़ जाता है। इतना ही नहीं ईरान से होने वाले पेमेंट लेने में भी बैंक आनकानी करते हैं। इस बारे में भी बैंकों को जरूरी निर्देश जारी किए जा सकते हैं।


दरअसल पिछले हफ्ते वित्त मंत्रालय, रिजर्व बैंक और उद्योग मंत्रालय की इस मुद्दे पर अहम बैठक हुई थी। इसी बैठक में ये फैसला लिया गया कि एक टास्क फोर्स बनाया जाए। ये टास्क फोर्स इन नियमों में जरूरी फेरबदल का मसौदा तैयार करेगा। जिन नियमों में बदलाव किया जाना है उनमें रिजर्व बैंक की एक्सपोर्ट डाटा प्रोसेसिंग एंड मॉनिटरिंग सिस्टम यानी ईडीपीएमएस स्कीम भी है। इस स्कीम के नियमों में ढील देते हुए कॉशन लिस्ट की शर्तें आसान की जा सकती हैं।


एक्सपोर्टर्स चाहते हैं कि अगर दस्तावेज समय पर जमा नहीं करने में किसी एक्सपोटर्स की गलती नहीं है तो उसे कॉशन लिस्ट में नहीं डाला जाए। क्योंकि कॉशन लिस्ट में आने के बाद एक्सपोर्टर्स को बैंक की तरफ से पैसे मिलने में दिक्कत होती है। इन नियमों में ढील से टेक्सटाइल, एग्रो प्रोडक्ट जैसे आइटम के एक्सपोर्ट को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही ईरान, अफगानिस्तान या फिर ईरान के आसपास के देशों में एक्सपोर्टर्स को एक नया बाजार मिलेगा।