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एनडीए ने कोविंद को बनाया राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार

प्रकाशित Mon, 19, 2017 पर 14:09  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

राष्ट्रपति पद के लिए किसी सर्वमान्य उम्मीदवार की पहचान पर असमंजस की स्थिति को तोड़ते हुए आज एनडीए ने अपने उम्मीदवार का एलान कर दिया। एनडीए के उम्मीदवार हैं बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद। आज बीजेपी की बैठक में उनके नाम पर फैसला हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद मोदी ने रामनाथ कोविंद की उम्मीदवारी को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी बात की है। पीएम मोदी ने तेलंगाना के सीएम के चंद्रशेखर राव से भी बात की जिसके बाद उन्होंने कोविंद के नाम पर सहमति जता दी है। वहीं बीजेपी की बैठक के बाद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने प्रेस कॉनफ्रेंस करके रामनाथ कोविंद के नाम का एलान किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष को इस नाम के बारे में जानकारी दे दी गई है और उम्मीद है कि कोविंद के नाम पर सहमति बन जाएगी।


अब ये लगभग तय है कि रामनाथ कोविंद देश के अगले  राष्ट्रपति होंगे। एनडीए ने कोविंद के नाम का एलान किया है। उम्मीद है दलित समुदाय से आने वाले कोविंद के नाम पर विपक्ष भी सहमत हो जाएगा। रामनाथ कोविंद का जन्म 1 अक्टूबर 1945 को उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की तहसील डेरापुर के एक छोटे से गांव परौंख में हुआ था। रामनाथ कोविंद कानपुर यूनिवर्सिटी से बीकॉम और एलएलबी हैं। वकालत की उपाधि लेने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट में वकालत प्रारंभ की। 1977 से 1979 तक दिल्ली हाईकोर्ट में केंद्र सरकार के वकील रहे, कोविंद संघ के कद्दावर नेता रहे हैं। ये 1991 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए फिर 1994 और 2000 में उत्तरप्रदेश से राज्यसभा के लिए चुने गए। कोविंद लगातार 12 वर्ष तक राज्यसभा सांसद रहे। कोविंद कई संसदीय समितियों के सदस्य रहे। कोविंद बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता रह चुके हैं, वो बीजेपी दलित मोर्चा और अखिल भारतीय कोली समाज के अध्यक्ष भी रहे। 8 अगस्त 2015 को उनकी बिहार के राज्यपाल के पद पर नियुक्ति हुई। रामनाथ कोविंद वकील से लेकर राजनेता तक की भूमिकाओं में हमेशा कमजोर वर्ग के हक की लड़ाई लड़ते रहे हैं।


एनडीए में कोविंद के नाम पर सहमति बनाने के बाद पीएम मोदी ने ट्वीट करते हुए कहा कि मुझे पूरा भरोसा है कि रामनाथ कोविंद एक बेहतर राष्ट्रपति साबित होंगे। संविधान और कानून पर उनकी गहरी पकड़ा है, इससे देश को फायदा होगा। वो गरीबों और पिछड़ों की आवाज बनेंगे।


वहीं कांग्रेस ने कोविंद के नाम पर अपने पत्ते नहीं खोले हैं। कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा है कि पार्टी विपक्ष के दूसरे नेताओं से बात के बाद ही कोविंद के नाम पर फैसला लेगी। उधर शिवसेना का भी कहना है कि पार्टी बैठक के बाद ही कोविंद के नाम पर अपना रुख साफ करेगी।


लेफ्ट पार्टियों सीपीएम और सीपीआई ने राष्ट्रपति पद के लिए रामनाथ कोविंद के नाम का विरोध किया है। सीपीएम का कहना है कि कोविंद के नाम का चुनाव सर्वसम्मति से नहीं हुआ है।