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नतीजों से पहले जानें कौन कराएगा मालामाल

प्रकाशित Fri, 07, 2017 पर 12:57  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

अगले हफ्ते से शुरू होने वाला है रिजल्ट सीजन और इस बार सबकी खास नजर इस बात पर रहेगी कि जीएसटी लागू होने के बाद प्रदर्शन पर कैसे असर दिखता है, तो कौनसे वो सेक्टर हैं जिनके हालात सुधरते दिखेंगे और कौन करेगा निराश। ये बताने के लिए सीएनबीसी-आवाज़ लेकर आया है नतीजों का सबसे पहला अनुमान। यहां हम आपको बताएंगे कि नतीजों से पहले आपकी क्या स्ट्रैटेजी होनी चाहिए और ये सब बताने के लिए सीएनबीसी-आवाज़ के साथ हैं मार्केट एक्सपर्ट सुदीप बंद्योपाध्याय और इंडिया इंफोलाइन के एक्जिक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट संजीव भसीन।


जून तिमाही से उम्मीदों की बात करें तो निफ्टी कंपनियों की आय में 10 फीसदी ग्रोथ की उम्मीद है। वहीं निफ्टी कंपनियों का मुनाफा 2 फीसदी गिरने की आशंका है। इस तिमाही में लागत बढ़ने से ज्यादातर कंपनियों के मार्जिन पर असर दिखेगा।


जून तिमाही में आईटी सेक्टर पर अनुमान है कि बड़े ऑर्डर नहीं मिलने की वजह से जून तिमाही में आईटी सेक्टर के नतीजे फीके रहेंगे। तिमाही दर तिमाही ग्रोथ -3 फीसदी से +2 फीसदी की रेंज में रहेगी। इस तिमाही में टीसीएस, इंफोसिस, एचसीएल टेक के नतीजों में ग्रोथ दिखेगी वहीं टेक महिंद्रा, विप्रो के खराब नतीजों की आशंका है।


जून तिमाही में सस्ते क्रूड और मजबूत करेंसी का असर ऑयल-गैस सेक्टर पर दिखेगा। मार्केटिंग कंपनियों के रिफाइनिंग मार्जिन पर भी दबाव दिखेगा। फार्मा सेक्टर की बात करें तो जीएसटी लागू होने से पहले बिक्री पर असर दिखेगा, एक्सपोर्ट पर ज्यादा इन्सेंटिव देने से मार्जिन पर भी असर रहेगा।


बैंकिंग-फाइनेंस सेक्टर पर अनुमान है कि जून तिमाही में बैंकिंग-फाइनेंस कंपनियों के लोन ग्रोथ और नेट इंटरेस्ट मार्जिन पर दबाव दिखेगा। ज्यादा प्रोविजनिंग की वजह से दबाव कायम रहेगा। कॉरपोरेट लोन देने वालों का ऑपरेटिंग प्रॉफिट कम रहेगा। सरकारी बैंकों की हालत कमजोर रहेगी जबकि निजी बैंकों का मार्केट शेयर बढ़ेगा।


जानकारों का मामना है कि जून तिमाही में एफएमसीजी कंपनियों के मुनाफे और एबिटडा पर दबाव बना रहेगा। जीएसटी से पहले की गई बिक्री से थोक कारोबार पर ज्यादा असर
रहेगा और प्रचार पर बढ़ते खर्च से ग्रॉस मार्जिन में ज्यादा बढ़त नहीं दिखेगी।


मेटल-माइनिंग सेक्टर की बात करें तो जानकारों की राय है कि जून तिमाही में फेरस, नॉन-फेरस कंपनियों की ग्रोथ जारी रहेगी। नॉन-फेरस कंपनियों की वॉल्यूम ग्रोथ बेहतर रहेगी। क्षमता विस्तार से वेदांता, टाटा स्टील, हिंद जिंक को फायदा होगा। माइनिंग कंपनियों के नतीजे कमजोर रह सकते हैं।


ऑटो कंपनियों की बात करें तो जानकारों की राय है कि जीएसटी सेल के बावजूद जून तिमाही में पैसेंजर व्हीकल में सिर्फ 5 फीसदी वॉल्यूम ग्रोथ देखने को मिलेगी। छोटी-मझोली गाड़ियों के सेगमेंट में वॉल्यूम 30 फीसदी कम रह सकती है। वहीं टू-व्हीलर सेगमेंट में वॉल्यूम में 7.5 फीसदी की बढ़त देखने को मिल सकती है।


पावर कंपनियो पर जून तिमाही के अनुमान की बात करें तो अप्रैल-मई में मांग 4.6 फीसदी बढ़ी है। साथ ही बिजली उत्पादन भी बढ़ा है। ग्लोबल मार्केट में कोयला महंगा होने का असर पावर कंपनियों पर दिखेगा। जानकारों का कहना है कि जून तिमाही में पावर ग्रिड के मुनाफे में अच्छी ग्रोथ दिख सकती है। जेनरेशन वॉल्यूम बढ़ने से एनटीपीसी का मुनाफा बेहतर रहेगा।


जून तिमाही के नतीजों पर इंडिया इंफोलाइन की राय है कि इस तिमाही में आईटी कंपनियों के गाइडेंस पर नजर रहेगी। पीएसयू बैंकों के ट्रेजरी मुनाफे, एसेट क्वालिटी में सुधार दिखेगा। प्राइवेट बैंकों के नेट इंटरेस्ट मार्जिन बेहतर होंगे। वहीं ऑटो, फार्मा कंपनियों से मिलेजुले नतीजों की उम्मीद है। लागत घटने से एफएमसीजी कंपनियों के मार्जिन में सुधार दिखेगा जबकि मांग बढ़ने से मेटल-माइनिंग कंपनियों के नतीजे अच्छे रहेंगे। मार्जिन बढ़ने से पावर ग्रिड का प्रदर्शन अच्छा रहेगा।


संजीव भसीन की पसंद


डॉ रेड्डीज: खरीदें - 2668 रुपये, लक्ष्य - 3100 रुपये


सुदीप बंद्योपाध्याय की पसंद


फेडरल बैंक: खरीदें (1 साल के लिए) - 115 रुपये, लक्ष्य - 150 रुपये


टाटा केमिकल्स: खरीदें (6 महीने के लिए) - 644 रुपये, लक्ष्य - 700 रुपये