Moneycontrol » समाचार » बाज़ार खबरें

बच्चों को मोबाइल की लत, कैसे बचाएं बचपन!

प्रकाशित Fri, 07, 2017 पर 16:36  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

मोबाइल बच्चों का बचपन छीन रहा है। मोबाइल की लत बच्चों पर इस कदर हावी हो रही है कि बच्चे इसके लिए कुछ भी करने के लिए तैयार हैं। अगर आपका बच्चा भी इसी राह पर आगे बढ़ रहा है तो आपके लिए खतरे की घंटी है।


मोबाइल की लत एक बार फिर सुर्खियों में है। हरियाणा में 9 साल के एक बच्चे को इसकी इतनी बुरी लत थी कि उसने स्मार्टफोन छीने जाने की वजह से अपना हाथ काटने की कोशिश की। मोबाइल की लत का ये इकलौता मामला नहीं है। देश भर में बच्चे और युवा बड़ी संख्या में मोबाइल की लत का शिकार हो रहे हैं।


10 साल का का सूर्यांश मोबाइल के बिना एक पल नहीं रह सकता। उससे अगर मोबाइल छीन लिया जाए तो वो गुस्से में आ जाता है। दूसरी ओर, सूर्यांश का कहना है कि उसे मोबाइल गेम पसंद हैं और उसके मम्मी-पापा अक्सर तब मोबाइल छीन लेते हैं जब वो जीतने वाला होता है।


सूर्यांश कई बार मोबाइल ऐसी जगह छुपा देता है जिसे उसके मां बाप ढूंढ़ ना सकें। तो क्या सूर्यांश को मोबाइल की लत लग चुकी है। ऐसा ही एडिक्शन है दिल्ली यूनिवर्सिटी की प्रज्ञा को। उसे व्हाट्सऐप की ऐसी लत है कि वो पूरी रात जगी रह जाती है। अब वह अस्पताल में काउंसलिंग ले रही हैं।


मोबाइल और साइबर एडिक्शन अब एक गंभीर समस्या बनती जा रही है जो हमारी दिनचर्या पर बुरा असर डाल रही है। कई मामलों में तो ये जिंदगी को भी खतरे में डाल रही है।


मोबाइल अब सिर्फ फोन या मैसेज करने तक ही सीमित नहीं रहा है। ना जाने कितने ही तरह के ऐप्स, व्हाट्सएप, और गेम्स हमें दिन भर व्यस्त रखते हैं । लेकिन अगर मोबाइल के बिना आपको बैचैनी होती है तो आपके लिए चिंता की बात है।


वहीं मोबाइल एडिक्शन में सबसे बड़ी समस्या इसकी पहचान को लेकर होती है। आखिर कैसे पता चले कि मोबाइल आपकी जरूरत भर है या एक लत बन गई है।


स्मार्टफोन हमारी जिंदगी में इस कदर शामिल हो चुका है कि दफ्तर हो या घर, हर वक्त वो हमारे हाथ में ही रहता है। छोटी-छोटी उम्र के बच्चे तक इसके आदी होते जा रहे हैं। व्हाट्सएप, फेसबुक, गेम्स सब कुछ स्मार्टफोन पर होने की वजह से युवाओं में इसकी आदत अब धीरे-धीरे लत में तब्दील होती जा रही है। तो फिर कैसे पता चले कि हम मोबाइल एडिक्ट बन रहे हैं ।


देश में निम्हांस, एआईआईएमएस और सर गंगाराम अस्पताल जैसे संस्थानों में मोबाइल की लत के शिकार लोगों के इलाज के लिए खास क्लीनिक हैं। और, यहां आने वाले मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है।


मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि मां-बाप को मोबाइल के लती बच्चों के साथ क्वालिटी टाइम बिताना चाहिए। बच्चों को गैजेट्स से दूर रखना चाहिए। कम से कम एक वक्त का खाना अपने बच्चों के साथ खाना चाहिए। मोबाइल और गैजेट्स की लत हटाने के लिए डिजिटल डिटॉक्स की मदद भी ले सकते हैं, यानी कुछ दिनों तक मोबाइल और इंटरनेट से छुट्टी।


डिजिटल डिटॉक्स का एक बड़ा फायदा ये है कि छुट्टियां का पूरा मजा आप असली दुनिया में उठाते हैं, मोबाइल की आभाषी दुनिया में नहीं।  मोबाइल की लत मिटाने के लिए उससे गैर-जरूरी नोटिफिकेशन हटाना भी बेहतर उपाय है। और, सबसे अच्छा तो यही है कि परिवार के साथ ज्यादा समय बातचीत और खेलकूद में बिताया जाए।