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आवाज अड्डाः लालू पर एक्शन, क्या नीतीश रखेंगे नाता!

प्रकाशित Fri, 07, 2017 पर 20:48  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

बिहार विधानसभा चुनाव में चौंकाने वाले नतीजों ने लालू यादव को ना सिर्फ एक बार फिर बिहार की सत्ता में बड़ा हिस्सा दिलाया, बल्कि कमजोर विपक्ष वाली देश की मौजूदा राजनीति के केंद्र में भी खड़ा कर दिया। लेकिन इस वापसी के एक साल पूरा होते-होते भ्रष्टाचार का जिन्न भी एक बार फिर लालू के सामने खड़ा हो गया। पहले बेनामी संपत्ति के मामलों में परिवार के सदस्यों के खिलाफ जांच शुरू हुई, फिर चारा घोटाले का एक मामला दोबारा खुल गया और अब सीबीआई ने परिवार के 3 प्रमुख सदस्यों पर एफआईआर कर दी। क्या इस झटके से लालू समेत पूरे विपक्ष की राजनीतिक बिसात हिलने वाली है? या लालू पहले की तरह एक बार फिर धूल झाड़ते हुए उठ खड़े होंगे? और इससे इतर कौन से सवाल हैं जो मौजूदा राजनीतिक हालात को मथ रहे हैं?


लालू का कुनबा एजेंसियां के निशाने पर है। बेनामी संपति के मामले में लालू के बड़े बेटे तेज प्रताप, बेटी मीसा भारती और दामाद शैलेश के खिलाफ इनकम टैक्स और ईडी की जांच चल रही है और अब रेल मंत्री रहते भ्रष्टाचार के मामले में खुद लालू, उनकी पत्नी और छोटे बेटे तेजस्वी पर सीबीआई ने एफआईआर कर दी है।


आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव पहले ही चारा घोटाला मामले में फंसे ही थे, सीबीआई ने लालू के पटना, रांची, पुरी, गुरुग्राम और दिल्ली समेत 12 ठिकानों पर एक साथ छापे डाले। पटना स्थित राबड़ी देवी के आवास पर सीबीआई की टीम ने लालू के बेटे तेजस्वी यादव और परिवार के अन्य सदस्यों से बंद कमरे में पूछताछ भी की है। इस एक्शन के बाद बिहार की राजनीति में सरगर्मियां काफी बढ़ गई हैं। बीजेपी ने लालू प्रसाद यादव पर हमले तेज कर दिए हैं। बीजेपी ने मुख्यमंत्री नितीश कुमार पर इस बात का दबाव भी बनाना शुरू कर दिया है कि वह तेज प्रताप और तेजस्वी यादव को अपने मंत्रिमंडल से बरखास्त करें। वहीं लालू प्रसाद यादव ने आरोप लगाया है कि केंद्र की बीजेपी सरकार उनके खिलाफ साजिश रच रही है।


लालू यादव के 12 ठिकानों पर छापामारी के बाद सीबीआई ने भी सफाई दी है। सीबीआई ने बताया कि शुरूआती जांच में ये पाया गया था कि प्राइवेट कंपनियों के टेंडर में गड़बड़ी पाई गई थी। जिसकी कार्यवाही में ये छापेमारी हो रही है। अब लालू परिवार का हर वो शख्स कानूनी के शिकंजे में है जो सांसद या विधायक है। लालू इसे राजनीतिक साजिश बता रहे हैं।


लालू यादव के वार पर सरकार ने पलटवार किया है। शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू का कहना है कि लालू पर ये केस पिछली सरकार के समय से है, जिसपर सीबीआई कार्यवाई कर रही है। सरकार पर आरोप लगाने के बाद वेंकैया नायडू ने खरा जवाब दिया है। सरकार पर आरोप लगाने को फैशन बताते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस के समय केस दर्ज हुआ था, सीबीआई सिर्फ अपना काम कर रही है।


इन सब के बावजूद विपक्ष में उतार-चढ़ाव का माहौल साफ नजर आ रहा है। साल 2015 बिहार चुनाव में महागठबंधन की जीत हुई जबकि बिहार में राहुल गांधी ने लालू से दूरी बनाए रखी। एसपी, एनसीपी महागठबंधन में शामिल नहीं हुए थे और मुलायम सिंह आखिरी वक्त में अलग हुए। वहीं आप नेता केजरीवाल की कांग्रेस से दूरी बनाएं रखी है। 2017 यूपी चुनाव में एसपी-कांग्रेस गठबंधन फेल रहा औऱ इसकी सबसे बड़ी वजह मुलायम परिवार में अंदरुनी घमासान रही। इधर, बंगाल में सीपीएम-कांग्रेस साथ दिखाई दिए तो ममता अलग हो गई। महाराष्ट्र में कांग्रेस-एनसीपी अलग होकर लड़े जबकि उत्तर-पूर्व में बीजेपी मजबूत हुई है।


1996 से कानून और राजनीति के दोहरे मोर्चे पर लड़ रहे लालू चोट खाने के बाद भी बीजेपी से टकराने को तैयार हैं, लेकिन विपक्ष उनकी इस लड़ाई में ज्यादा उत्साह नहीं दिखा रहा।


जाहिर है विपक्षी दल लालू के नाम पर भ्रष्टाचार के साथ खड़े नहीं दिखना चाहता। लेकिन लालू के सहारे बिहार में सरकार चला रहे नीतीश कुमार के लिए अब परीक्षा की घड़ी है।  


अब सवाल है कि नीतीश कुमार इस मौके का क्या इस्तेमाल करेंगे? वो आरजेडी और कांग्रेस से किनारा कर बीजेपी के साथ सरकार बनाने की तरफ बढ़ेंगे? या लालू यादव पर दबाव बनाकर, सरकार और विपक्षी खेमे में अपना कंट्रोल बढ़ाएंगे? क्या कांग्रेस इस मुहिम में नीतीश का साथ देगी? विपक्षी एकता की कोशिशों पर इसका क्या असर पड़ेगा? क्या विपक्ष इस बात की अनदेखी कर पाएगा कि चारा घोटाले और जंगल राज के तमगों के साथ भी लालू ने बिहार चुनाव में महागठबंधन बनाकर BJP को करारी शिकस्त दी है?