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आवाज अड्डाः दोराहे पर लालू- नीतीश की दोस्ती!

प्रकाशित Mon, 10, 2017 पर 21:13  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

लालू यादव या फिर कहें कि राष्ट्रीय जनता दल ने फैसला किया है कि बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव इस्तीफा नहीं देंगे और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अभी तक चुप्पी साध रखी है। बीजेपी और बिहार की दूसरी विपक्षी पार्टियां नीतीश के सुशासन पर सवाल खड़े कर रही हैं तो देश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस लालू के साथ खड़ी है। अब आगे क्या संभावनाएं बनती हैं और देश के राजनीतिक भविष्य के हिसाब से इन घटनाओं की क्या अहमियत बनती है?


सीबीआई की एफआईआर में नामजद बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव बिहार कैबिनेट से इस्तीफा नहीं देंगे। वैसे आरजेडी में सारे फैसले खुद लालू प्रसाद यादव करते हैं, लेकिन सीबीआई की कार्रवाई के बाद बाकायदा बैठक बुलाकर तेजस्वी यादव के साथ पूरी पार्टी का भरोसा भी दिखा दिया गया और ये भी साफ कर दिया गया कि पूरी पार्टी लालू परिवार पर हुई कार्रवाई को बीजेपी की राजनीतिक साजिश मानती है और इस लड़ाई के लिए तैयार है।


गौरतलब हो कि आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव पहले ही चारा घोटाला मामले में फंसे ही थे, सीबीआई ने लालू के पटना, रांची, पुरी, गुरुग्राम और दिल्ली समेत 12 ठिकानों पर एक साथ छापे डाले। पटना स्थित राबड़ी देवी के आवास पर सीबीआई की टीम ने लालू के बेटे तेजस्वी यादव और परिवार के अन्य सदस्यों से बंद कमरे में पूछताछ भी की है। इस एक्शन के बाद बिहार की राजनीति में सरगर्मियां काफी बढ़ गई हैं। बीजेपी ने लालू प्रसाद यादव पर हमले तेज कर दिए हैं। बीजेपी ने मुख्यमंत्री नितीश कुमार पर इस बात का दबाव भी बनाना शुरू कर दिया है कि वह तेज प्रताप और तेजस्वी यादव को अपने मंत्रिमंडल से बरखास्त करें। वहीं लालू प्रसाद यादव ने आरोप लगाया है कि केंद्र की बीजेपी सरकार उनके खिलाफ साजिश रच रही है।


लालू यादव के 12 ठिकानों पर छापामारी के बाद सीबीआई ने भी सफाई दी है। सीबीआई ने बताया कि शुरूआती जांच में ये पाया गया था कि प्राइवेट कंपनियों के टेंडर में गड़बड़ी पाई गई थी। जिसकी कार्यवाही में ये छापेमारी हो रही है। अब लालू परिवार का हर वो शख्स कानूनी के शिकंजे में है जो सांसद या विधायक है। लालू इसे राजनीतिक साजिश बता रहे हैं।


लालू यादव के वार पर सरकार ने पलटवार किया है। शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू का कहना है कि लालू पर ये केस पिछली सरकार के समय से है, जिसपर सीबीआई कार्यवाई कर रही है। सरकार पर आरोप लगाने के बाद वेंकैया नायडू ने खरा जवाब दिया है। सरकार पर आरोप लगाने को फैशन बताते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस के समय केस दर्ज हुआ था, सीबीआई सिर्फ अपना काम कर रही है।


इन सब के बावजूद विपक्ष में उतार-चढ़ाव का माहौल साफ नजर आ रहा है। साल 2015 बिहार चुनाव में महागठबंधन की जीत हुई जबकि बिहार में राहुल गांधी ने लालू से दूरी बनाए रखी। एसपी, एनसीपी महागठबंधन में शामिल नहीं हुए थे और मुलायम सिंह आखिरी वक्त में अलग हुए। वहीं आप नेता केजरीवाल की कांग्रेस से दूरी बनाएं रखी है। 2017 यूपी चुनाव में एसपी-कांग्रेस गठबंधन फेल रहा औऱ इसकी सबसे बड़ी वजह मुलायम परिवार में अंदरुनी घमासान रही। इधर, बंगाल में सीपीएम-कांग्रेस साथ दिखाई दिए तो ममता अलग हो गई। महाराष्ट्र में कांग्रेस-एनसीपी अलग होकर लड़े जबकि उत्तर-पूर्व में बीजेपी मजबूत हुई है।


अभी तक नीतीश कुमार ने चुप्पी साध रखी है, लेकिन जेडीयू के वरिष्ठ नेता शरद यादव ने इतना साफ कर दिया है कि अब कांग्रेस की तरह  जेडीयू भी आरजेडी की कॉन्सपिरेशी थ्योरी पर यकीन करती है
है।


मगर बिहार में कई बार भ्रष्टाचार पर सख्त रुख दिखा चुके नीतीश कुमार के लालू परिवार पर एफआईआर की अनदेखी करना आसान नहीं होगा। क्योंकि बिहार के विपक्षी दल अब उन्हीं मामलों की याद दिलाकर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगा रहे हैं।


मतलब तेजस्वी के मुद्दे पर नीतीश ने फैसला नहीं लिया तो दबाव बढ़ता जाएगा। क्या मौजूदा परिस्थितियों में नीतीश और लालू बहुत दिन तक साथ-साथ चल पाएंगे? सवाल ये भी है भ्रष्टाचार के तमाम आरोपों के बावजूद लालू विपक्ष के लिए अहम क्यों बने हुए हैं? और सवाल ये भी है कि  वोटर की नजर में भ्रष्टाचार कोई मुद्दा है भी या नहीं?