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काबू में आई महंगाई, अब ग्रोथ पर हो फोकस

प्रकाशित Thu, 13, 2017 पर 18:22  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

रिटेल महंगाई दर में और कमी आई है। जून में रिेटेल महंगाई दर यानि सीपीआई घटकर 1.54 फीसदी रही है। वहीं, मई में रिटेल महंगाई दर 2.18 फीसदी रही थी। महीने दर महीने आधार पर जून में कोर महंगाई दर 4.2 फीसदी से घटकर 3.8 फीसदी रही है।


वहीं इंडस्ट्री की ग्रोथ को झटका लगा है। आईआईपी ग्रोथ में गिरावट दर्ज की गई है। मई में आईआईपी ग्रोथ घटकर 1.7 फीसदी रही है। मई में 1.7 फीसदी की आईआईपी ग्रोथ नवंबर 2016 के बाद से सबसे निचले स्तरों पर आ गई है। वहीं, अप्रैल में आईआईपी ग्रोथ 2.8 फीसदी रही थी। अप्रैल में आईआईपी ग्रोथ 3.1 फीसदी से संशोधित कर 2.8 फीसदी की गई है।


कल आए महंगाई के आंकड़ों ने बड़ी राहत दी है और इसके बाद अब गेंद आरबीआई के पाले में है। क्योंकि आरबीआई के पास दरें घटाने का सही मौका है, तो इसी के लिए सीएनबीसी-आवाज़ मुहिम चला रहा है दरें घटाई जाएं और इस पर ज्यादा बात करने के लिए आवाज़ के साथ जुड़ रहे हैं क्रिसिल के चीफ इकोनॉमिस्ट डी के जोशी, सिट्रस एडवाइजर्स के फाउंडर संजय सिन्हा, और थर्मेक्स के एमडी एम एस उन्नीकृष्णन।


गौरतलब है कि 2 जून 2015 को आरबीआई ने दरों में 0.25 फीसदी की कटौती की थी तब महंगाई दर 5.01 फीसदी के आसपास थी। वहीं 29 सितंबर 2015 को महंगाई दर 3.74 फीसदी के आसपास रहने को दौरान आरबीआई ने दरों में 0.5 फीसदी की कटौती की थी। इसी तरह आरबीआई ने 5 अप्रैल 2016 में भी दरें 0.25 फीसदी घटाई थी, तब महंगाई 4.83 फीसदी पर थी। आरबीआई ने 4 अक्टूबर 2016 को दरें 0.25 फीसदी घटाई थीं तब महंगाई 4.40 फीसदी पर थी।