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आवाज़ अड्डा: गोरक्षा के नाम पर गुंडागर्दी, फायदा या नुकसान!

प्रकाशित Fri, 14, 2017 पर 13:40  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

एक तरफ है ये दावा कि यूपी में मुसलमानों ने भी बीजेपी को वोट दिया, दूसरी तरफ यूपी के ही एक बीजेपी विधायक का बयान कि देश हिंदुओं का है। एक तरफ गोरक्षकों को बार बार प्रधानमंत्री मोदी की फटकार और दूसरी तरफ बीफ के नाम पर लगातार गुंडागर्दी। एक तरफ सबका साथ, सबका विकास का नारा तो दूसरी तरफ भारत रत्न अमर्त्य सेन की टिप्पणी तक सेंसर के घेरे में। इन्हीं विरोधाभासों के बीच आज आवाज़ अड्डा में आज कोई ऐसा सूत्र तलाशने की कोशिश करेंगे, जो आगे की राह दिखाता हो, लेकिन उससे पहले जान लेते हैं कि आखिर ये चर्चा क्यों?


नागपुर में बीफ के नाम पर कुछ तथाकथित गोरक्षरकों की मारपीट का ये वीडियो वायरल है। महाराष्ट्र सरकार ने तुरंत इस संज्ञान लेते हुए कार्रवाई शुरु कर दी है, लेकिन ऐसी घटनाओं के जरिए अमरनाथ हमले से ध्यान भटकाने का आरोप लग रहा है।


अमरनाथ यात्रा पर हमले के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान ही एक इमाम के साथ मारपीट का वीडियो भी सामने आया है। आरोप है कि मोहम्मद यासीन को सिर्फ इसलिए पीट दिया क्योंकि वो वंदे मातरम और भारत माता की जय के नारे लगाने से इंकार कर रहा था। इधर अमरनाथ हमले से भड़के उत्तर प्रदेश के बीजेपी विधायक बृजभूषण राजपूत ने कहा है कि देश हिंदुओं का है। राममंदिर बनने में मुसलमान बाधा बने उन्हें हज यात्रा नहीं करने देंगे।


कांग्रेस मानती है कि ऐसी कार्रवाई और बयान को बीजेपी की टॉप लीडिरशिप की शह पर हो रहे हैं। इसके अलावा नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन की डॉक्यूमेंटरी पर सेंसर बोर्ड ने कैंची चला दी है। डॉक्यूमेंटरी निर्माता से सेंसर बोर्ड ने अमर्त्य के बयान में गाय, गुजरात और हिंदूत्व जैसे शब्दों को बीप करने के लिए कहा है। मोदी सरकार से अमर्त्य सेन की असहमति जगजाहिर है।


सारी घटनाओं को एक सूत्र में देखें तो ये उसी असहिष्णुता की बहस को फिर से जिंदा करता है जो साल डेढ़ साल पहले फोकस में था। सवाल है कि क्या हमें इस आजाद देश में अपनी मर्जी से खाने पीने की, बात करने की या किसी से सहमत असहमत होने की आजादी है या नहीं? क्या आलोचना को देशभक्ति या गद्दारी से जोड़कर अपने विरोधियों को बैकफुट पर डालना एक स्ट्रैटेजी है? सवाल ये भी है कि दो बार प्रधानमंत्री की फटकार के बावजूद ऐसे लोगों का हौसला इतना क्यों बढ़ गया है?