Moneycontrol » समाचार » बाज़ार खबरें

आवाज़ आंत्रप्रेन्योरः पुराने जूतों को नई शक्ल

प्रकाशित Sat, 15, 2017 पर 15:20  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

क्या आप जानते हैं कि दुनियाभर में 150 करोड़ गरीब जनता के पास पहनने के लिए जूते नहीं हैं। वैसे जूते एक ऐसी चीज है जिस पर लोग काफी पैसे खर्च करते हैं, लेकिन 35 करोड़ जूते इस्तेमाल होने के बाद कचरे में फेंक दिए जाते हैं। 18 साल के श्रीयांस और रमेश को फटे पुराने जूतों में एक बिजनस आइडिया दिखा जो जूतों को न सिर्फ रिसाइकल करता है बल्कि गरीबों को एक ब्रांड न्यू जूते भी दे रहा है।


बड़े चाव से बढ़िया जूते खरीदते हैं, इनका इस्तेमाल होता है लेकिन जैसे ही जूता थोड़ पुराना हो या खराब हो जाए तो उसे फेंक देते हैं। फिर इनका क्या होता है, आइए आपको बताते हैं कि आपके फेंके हुए जूतों को नई शक्ल देने का काम कर रहा है, मुंबई का स्टार्टअप ग्रीनसोल।


श्रीयांस भंडारी और रमेश धामी इन दो एथलीट्स ने मिलकर 2013 में शुरू किया ये सोशल वेंचर। ये पुराने जूते, चप्पलों के स्लिपर्स बनाकर ग्रामीण इलाकों में जरुरतमंद बच्चों को देते हैं। जूतों के इन डिजाइन्स को देखकर बिल्कुल नहीं लगता कि ये पुराने जूतों से बने हैं, तो कैसे बनता है पुराने से नया। ग्रीनसोल पुराने जूतों को इक्ठ्ठा करती है। कंपनी के मुंबई ऑफिस में इकठ्ठा हुए जूतों को अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया जाता है और फैक्ट्री में इनमें नई जान फूंकी जाती है।


फाउंडर्स ने अपनी खुद की बचाई 10 लाख की पूंजी से शू रिसाइकल का कारोबार शुरू किया। पुराने जूतों के कलेक्शन और फंड्स के लिए एक्सिस बैंक, जेएलएल, इंडियाबुल्स जैसे कॉरपोरेट्स इस नेक काम में जुड़ते गए। और ग्रीनसोल को 50 साल से शू मेकिंग के कारोबार में नाम कमा चुके राम एक्सपोर्ट्स का साथ मिला। राम एक्सपोर्ट्स, ग्रीनसोल को डिजाइनिंग, मैन्युफैक्चरिंग, मार्केट, कस्टमर कनेक्ट हर लेवल पर मदद कर रही है।


समाज के पिछड़े वर्ग को मदद करने के इरादे से शुरू हुए ग्रीनसोल के लिए सिर्फ सोशल वेंचर बन कर बिजनेस की गाड़ी चला पाना मुशकिल था। इसलिए फाइंउडर्स ने रिटेल पर फोकस करना शुरू किया। लगभग 15 ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्म्स पर कंपनी शू रिटेलिंग करती है। रियूज, रिसाइकल की इस फूटवेयर रेंज को ग्राहकों का अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। धीरे-धीरे इस काम की जागरुकता लोगों में फैल रही है और इसमें सेलिब्रिटीज का सहयोग भी काफी मददगार साबित हुआ है।


रिटेल की गाड़ी चल रही है लेकिन कंपनी का मूल समाज सेवा ही रहेगा। अब तक तेलंगाना, यूपी, राजस्थान के 50,000 बच्चों को चप्पलें डोनेट की जा चुकी हैं। लेकिन बच्चों को मुफ्त चप्पलों की आदत भी नहीं लगानी है। इसलिए अब कंपनी स्किल डेवलपमेंट सेंटर शुरू करने का प्लान बना रही है, ताकि इन इलाकों के युवाओं को रोजगार मिले।


शू रिसाइकल के इस कारोबार में आगे बैग्स, बेल्ट्स जैसे प्रोडक्ट भी जुड़ेंगे। सीएसआर का विस्तार और ऑफलाइन रिटेल में कदम रखने के प्लान भी कंपनी के हैं। इस साल 1 करोड़ का रेवेन्यू कमाने के बाद कंपनी का टार्गेट है अगले साल तक इसे 5 करोड़ तक ले जाना।