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क्रेडिट पॉलिसी में कटौती, कहां मिलेगा बेहतर ऑप्शन

प्रकाशित Wed, 02, 2017 पर 18:51  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

तो रिजर्व बैंक ने 0.25 फीसदी ब्याज दरें घटी दी। अब आपके मन में इस कटौती को लेकर कई सवाल आ रहे होंगें। आपके जमा और कर्ज पर कितना असर पडेगा, साथ ही आपके फाइनेंशियल पोर्टफोलियो में किस तरह के बदलाव करने अब जरूरी हो गए हैं, योर मनी का पूरा फोकस आज इसी बात पर रहेगा।  हम आपको ना सिर्फ ये बताएंगें की आपकी जेब पर ईएमआई का बोझ कितना कम होगा, बल्कि इस रेट कट के बाद, किस निवेश विकल्प से आपको ज्यादा से ज्यादा लाभ हो सकता है ये भी हम बताएंगें और हमारा साथ देगें ऑप्टिमा मनी मैनेजर्स के डायरेक्टर पंकज मठपाल।


आरबीआई ने क्रेडिट पॉलिसी में रेपो रेट 0.25 फीसदी की कटौती कर दी है। नई रेपो दर 6.25 फीसदी से घटकर 6 फीसदी रह गई है। इसी के साथ रिवर्स दर घटकर 5.75 फीसदी रह गई है। वहीं मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी यानी एमएसएफ दर और बैंक दर 6.5 फीसदी से घटकर 6.25 फीसदी रह गई है। हालांकि सीआरआर में कोई बदलाव नहीं किया गया है।


मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी की 6 में से 4 सदस्यों ने 0.25 फीसदी कटौती के पक्ष में वोट दिया था। वहीं एक सदस्य ने 0.5 फीसदी और एक सदस्य ने कोई बदलाव नहीं करने का समर्थन किया था। आरबीआई ने रिटेल महंगाई का अनुमान 4 फीसदी रखा है। आरबीआई को लगता है कि अगले 1.5 से 2 साल में रिटेल महंगाई बढ़ सकती है।


रिजर्व बैंक ने निवेशकों को सस्ते कर्ज का तोहफा किया है। दरें कम होने से ईएमआई कम होने का रास्ता साफ हो गया है। कंज्यूमर के मन में अब यही सवाल है की चौथाई फीसदती दरें कम होने से उनकी ईएमआई पर क्या असर पड़ेगा।


मान लीजिए अगर बैंकों ने भी 0.25 फीसदी कर्ज सस्ता किया तो ईएमआई का बोझ कम होना तय है। अगर आपने 30 लाख का होमलोन 20 साल के लिए लिया है तो हर महीने आपकी 475 रुपये की बचत होगी। मौजूदा ब्याज में आपको हर महीने 26,320 की ईएमआई चुकानी होती है लेकिन कर्ज सस्ता होने के बाद आपकी ईएमआई 475 रुपये कम होकर 25,845 रुपये हो जाएगी।


पंकज मठपाल का कहना है कि डेट फंड बॉन्ड, डिबेंचर, कॉरपोरेट डिपॉजिट में निवेश करते हैं। डेट फंड के रिटर्न में उतार-चढ़ाव कम होता है जिसका फायदा यह है कि ब्याज दरें घटने पर डेट फंड के रिटर्न बढ़ते हैं। हालांकि डेट फंड लेते समय क्रेडिट रिस्क, ब्याज और अवधि को ध्यान में रखना जरुरी है क्योंकि डेट फंड में लॉक-इन पीरियड नहीं होता है।


डेट फंड में निवेश का यह भी फायदा है कि 3 साल से कम के निवेश पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स होता है। डेट फंड पर शॉर्ट टर्म टैक्स इनकम स्लैब के मुताबिक होता है। इसलिए 3 साल से ज्यादा के निवेश पर इंडेक्सेशन के बाद 20 फीसदी टैक्स है। हालांकि इंडेक्सेशन महंगाई पर निर्भर करता है।


पंकज मठपाल ने आगे कहा कि अक्सर निवेशक फंड्स को लेकर चिंता में रहते है। लेकिन डेट फंड समय की अवधि के हिसाब से फंड के प्रकार है। जैसे लॉन्ग टर्म डेट फंड में लंबी अवधि के लिए निवेश किया जाता है जबकि इनकम/डायनामिक बॉन्ड फंड में 1 से 3 साल के लिए निवेश किया जाता है।


शॉर्ट टर्म फंड में 1 साल के लिए निवेश किया जाता है। लिक्विड/अल्ट्रा शॉर्ट टर्म फंड में बहुत छोटी अवधि के लिए निवेश किया जाता है। गिल्ट फंड में कम जोखिम, सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश करें क्योंकि छोटी अवधि के निवेश में उतार-चढ़ाव कम होता है जबकि लंबी अवधि के निवेश में उतार-चढ़ाव ज्यादा होता है। अक्रुअल फंड में मैच्योरिटी तक का निवेश किया जाता है और उतार-चढ़ाव कम होता है। वहीं ड्यूरेशन फंड में ज्यादा जोखिम होता है और इसे फंड मैनेजर की समझ से निवेश किया जाता है। ब्याज दरें घटने पर डेट फंड के रिटर्न में बढ़ोतरी होती है। ब्याज दरें कम होने पर लॉन्ग टर्म डेट फंड में निवेश करें।