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आवाज अड्डाः हुर्रियत पर सख्ती से अलगाववादियों के हौसले होंगे पस्त!

प्रकाशित Fri, 04, 2017 पर 09:41  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

आजादी के बाद कश्मीर की खूबसूरत वादियां भारत के हिस्से आईं तो जरूर, मगर उसके साथ आई अलगाववाद की बर्फ, जिसे हम आज तक पिघला नहीं पाए। इस जन्नत के हाथ से निकलने की जलन में पाकिस्तान, रंग में भंग डालने के लिए हर हथकंडा अपना रहा है। जब ये गर्म हवाएं बढ़ती हैं तो कश्मीर की बर्फ पिघलने की बजाए और जमने लगती है। फिर हम संविधान की किताब खोलकर बैठ जाते हैं,  370 और 35A जैसी धाराएं गिनने लगते हैं। अभी देश में कश्मीर पर बिल्कुल साफ राय रखने वाली मजबूत सरकार दिल्ली में बैठी है और अपनी ताकत देकर श्रीनगर में भी सरकार चलवा रही है। ऊपर-ऊपर हवा तो इस बार भी गर्म है, मगर बर्फ की तासीर क्या कहती है?


कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ सुरक्षा बल फुल एक्शन में हैं। इस साल सौ से ज्यादा आतंकी ढेर हो चुके हैं। जाहिर है आतंकवादियों पर दबाब बढ़ा है। आतंकवादियों का सैद्धांतिक समर्थन करने वाली हुर्रियत के नेताओं पर पहली बार बड़ा एक्शन किया जा रहा है, वो भी एनआईए के जरिए। ऐसा लगता है कि बीजेपी के सहयोग से सरकार चला रही मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती भी अब सहज नहीं हैं और हुर्रियत पर सख्ती और धारा 35A में छेड़छाड़ के नाम पर बागी तेवर दिखा रही हैं।


संविधान की धारा 35A जम्मू-कश्मीर को अलग संविधान समेत तमाम छूट देने वाली धारा 370 के तहत जोड़ा गया संशोधन है जो जम्मू-कश्मीर को स्थायी नागरिक की परिभाषा और विशेष अधिकार तय करने का हक देता है। 35A के चलते ही जम्मू-कश्मीर में न तो बाहर का आदमी संपति ले सकता है, ना ही वहां बस सकता है। सरकारी नौकरियों, सरकारी शिक्षण संस्थाओं और स्कॉलरशिप में भी सिर्फ स्थायी नागरिक को ही मौका मिलता है। यहां तक कि विवाह और उत्तराधिकार के नियम भी अलग हैं।


कुल मिलाकर अगर धारा 370 को जम्मू-कश्मीर की सीमित संप्रभुता की जड़ें माना जाए तो 35A उसकी टहनियों का काम करता है। धारा 370 को हटाना बीजेपी के कोर एजेंडा और चुनावी घोषणा पत्र का हिस्सा रहा है। इस लिहाज से बीजेपी-पीडीपी के बेमेल गठबंधन पर शुरु से सवाल उठता रहा है, जिसका सीधा जवाब देने से केंद्र सरकार बचती रही है।


ऐसे में सवाल उठता है कि क्या हाल के दिनों में बीजेपी-पीडीपी के बीच फासला बढ़ा है? सुरक्षा बलों के कड़े एक्शन के बाद आतंकवादी घटनाएं रुकेंगे और क्या कश्मीर समस्या के हल के लिए धारा 370 पर नए सिरे से गौर करने की जरूरत है?