Facebook Pixel Code = /home/moneycontrol/commonstore/commonfiles/header_tag_manager.php
Moneycontrol » समाचार » राजनीति

आवाज अड्डाः पटेल की वापसी, कहां चुके चाणक्य शाह!

प्रकाशित Thu, 10, 2017 पर 10:11  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

राजनीति और शतरंज में कब खुद शह देनेवाला मात खा जाए, कहा नहीं जा सकता। गुजरात के राज्यसभा चुनाव के पहले ही अहमद पटेल को बीजेपी ने शह दे दी थी, लेकिन वोटिंग के वक्त जरा सी चूक और इलेक्शन कमीशन के एक फैसले ने पूरी बाजी पलट दी। और चुनावों के चैंपियन माने जाने वाले बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को मात खानी पड़ी। अब नवंबर में गुजरात विधानसभा के लिए चुनाव होने हैं और बीजेपी को 22 साल की एंटी इन्कंबेंसी का मुकाबला करना है। इसके अलावा दिसंबर में हिमाचल में भी चुनाव होंगे और वहां अभी कांग्रेस की सरकार है। आज अड्डा में बीजेपी और कांग्रेस की अगली-पिछली राजनीतिक बाजियों को समझेंगे, लेकिन उससे पहले समझ लेते हैं कि राज्यसभा की एक सीट का खेल इतना बड़ा कैसे हो गया। 


ये पहली बार था कि राज्यसभा की एक सीट के लिए आधी रात तक पूरे देश ने हाई वोल्टेज पॉलिटिकल ड्रामा देखा। देश की दो सबसे बड़ी पार्टियों के बीच 15 दिन से चल रही रस्साकशी का अंत वोटों के साथ-साथ इलेक्शन कमीशन के फैसले के साथ हुआ।


देश की सबसे मजबूत पार्टी के खिलाफ फैसले ने इलेक्शन कमीशन के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ाया तो इससे बीजेपी की किरकिरी एकदम स्वाभाविक थी। और सारी तिकड़म के बावजूद सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल भी राज्यसभा पहुंच ही गए।


2014 के बाद से लगातार राजनीतिक हाशिए की तरफ जाती हुई कांग्रेस के लिए इस एक जीत ने संजीवनी का काम किया है, और विधानसभा चुनाव में अभी नहीं तो कभी नहीं का नारा दे चुके पटेल अब नए जोश में दिख रहे हैं।


इधर बीजेपी इलेक्शन कमीशन के फैसले को कानूनी तरीके से चुनौती देने के रास्ते तलाश रही है, लेकिन ये चिंता भी साफ दिख रही है कि राज्यसभा चुनाव में उल्टा पड़ चुका दाव विधानसभा चुनाव तक बड़ी समस्या ना बन जाए।


सवाल उठता है कि क्या 22 साल की एंटी इंकंबेंसी से बीजेपी घबराई हुई है और विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को कमजोर करने के लिए पार्टी ने राज्यसभा चुनाव में गैरजरूरी रिस्क लिया? इतनी फजीहत के बाद आखिर बीजेपी को हासिल क्या हुआ और सबसे बड़ा सवाल कि किस्मत से मिली इस जीत के बाद भी क्या सोई हुई कांग्रेस पार्टीबीजेपी की अगली गलती का इंतजार करती रहेगी या जागृत विपक्ष की भूमिका अपनाएगी?