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आवाज अड्डा: सत्ता के लिए धर्म बना हथियार!

प्रकाशित Fri, 11, 2017 पर 12:51  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

70 साल की आजादी और 5 हजार साल से भी पुराना इतिहास, सब मानते हैं कि भारत जैसा दुनिया में दूसरा कोई देश नहीं। लेकिन हमारी आपकी समस्या तो आज की है, शायद यही वजह है कि आज के मसले हमें देश के इतिहास, संस्कृति और विरासत पर भारी लगने लगते हैं। ये ठीक नहीं है लेकिन इसका मतलब ये भी नहीं कि हम सामने खड़े सवालों से आंख चुराने लगें। पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी जब मुसलमानों में असुरक्षा के भाव की बात करते हैं तो इसे कुछ लोग सच्चाई का बयान कहते हैं और कुछ लोग राजनीति पर कहीं ना कहीं इसमें तेरा इंडिया, मेरा इंडिया की छाया भी देखी जा सकती है, जो इन दिनों खासी चर्चा में है। आवाज़ अड्डा में आज इसी पर चर्चा हो रही है लेकिन पहले हामिद अंसारी की बात और उसपर खड़े हो रहे सवालों की।


10 साल उपराष्ट्रपति रह चुके हामिद अंसारी ने जाते-जाते अल्पसंख्यकों की असुरक्षा को लेकर गंभीर टिप्पणी की है। उन्होंने बंगलुरू में नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी के कॉन्वोकेशन के दौरान कहा कि संविधान में दी गई समानता का सच्चे अर्थों में पालन करने पर ही सबका साथ, सबका विकास का नारा पूरा होगा। वहीं राज्यसभा टीवी को दिए गए इंटरव्यू में हामिद अंसारी ने कहा कि देश के मुसलमानों में असुरक्षा की भावना है।


हामिद अंसारी की इस टिप्पणी को विपक्ष के कई नेताओं ने भी मौजूदा हालात का सच्चा बयान बताया है। लेकिन बीजेपी, शिवसेना जैसी पार्टियां इसे राजनीतिक बयान बता रही हैं। हामिद अंसारी के बाद उपराष्ट्रपति का पद संभालने वाले वेंकैया नायडू ने भी ये बात नहीं मानते कि मुसलमानों या अल्पसंख्यकों में भय का माहौल है। लेकिन हामिद अंसारी की बात को क्या सिरे से खारिज किया जा सकता है? क्या कुछ इसी तरह के सवाल इस देश की एक बड़ी आबादी के मन में नहीं उठ रहे हैं? और जरूरी नहीं कि ये सवाल उठाने वाला हर शख्स मुसलमान ही हो।