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इस स्वतंत्रता दिवस भूख से आजादी

प्रकाशित Fri, 11, 2017 पर 16:21  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

भूख ना रोक सके पढ़ाई, कुछ इसी मकसद को पूरा करने के लिए अक्षयपात्रा फाउंडेशन देशभर के उन गरीब बच्चों को खाना मुहैया कराता है जो पेट में दाना नहीं रहने की वजह से पढ़ाई नहीं कर पाते। संस्था सिर्फ पेट ही नहीं भरती बल्कि पौष्टिक खाना मिले इसका भी ख्याल रखती है। इसलिए हमने महाराष्ट्र के सबसे बड़े अक्षयपात्रा फाउंडेशन सेंटर मुंबई के थाने पहुंचे और पूरा हाल जाना कि कैसे जररूतमंदों तक खाना पहुंचने से पहले उसे तैयार किया जाता है। अक्षयपात्रा 12 राज्यों में 16 लाख बच्चों को खाना देती है, 35,000 स्कूलों को ये सुविधा मिलती है।


अक्षयपात्र का मतलब वो बरतन जिसमें खाना कभी खत्म ना हो, अक्षय पात्र का ये नाम हिंदू पौराणिक कथाओं से लिया गया हैं। इसी कहानी को हकीकत बना रहा है। अक्षयपात्रा फाउंडेशन जो जून 2000 से नगर निगम और जिला परिषद स्कूल के बच्चों को दोपहर का खाना मुहैया कराता है। यही नहीं संस्था आंगनवाड़ी केंद्रों पर भी भी भोजन भेजती है। बच्चों, स्तनपान कराने वाली माताओं और गर्भवती महिलाओं को स्वस्थ और पौष्टिक भोजन भी मुहैया कराया जाता है।


आधुनिक सुविधाओं से लैस सेंट्रलाइज्ड ऑटोमेटेड किचेन में पूरी तरह सात्विक भोजन तैयार होता है। प्याज लहसुन के बिना ही खाना बनता है। दाल, चावल, दाल तड़का, रोटी और मसालेदार करी बनाई जाती है। खाना दो शिफ्ट में बनकर तैयार होता है। एचएसीसीपी मानकों का ख्याल रखने के साथ साथ सभी दूसरे तरह के हाइजीन का भी ख्याल रखा जाता है। इसके लिए खास तौर पर कंटेनर और वाहनों का इंतजाम है। किन किन स्कूलों मे ये खाना जाएगा इसका फैसला ठाणे नगर निगम करती है।


बैंगलोर आधारित एनजीओ अक्षय पात्रा फाउंडेशन दुनिया का सबसे बड़ा मिड डे मील चलाती है और पीपीपी (सार्वजनिक निजी भागीदारी) मॉडल पर काम करती है। फंड के लिए संस्था दान पर निर्भर है जो कि केंद्र और राज्य सरकार, कॉर्पोरेट से मिलता है। इसके अलावा कुछ लोग निजी तौर पर भी दान देते हैं। संस्था अब मिशन 2020 को पूरा करने में लगी है जिसके तहत 50 लाख बच्चों को को जोड़ा जाएगा।