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व्यापारियों की मांग, ऑनलाइन पेमेंट टैक्स रिबेट दे सरकार

प्रकाशित Wed, 06, 2017 पर 19:16  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

नोटबंदी के 10 महीने बीतने के बाद भी व्यापारियों के लिए डिजिटल पेमेंट बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। व्यापारी संस्था कैट के मुताबिक ट्रांजैक्शन चार्ज बहुत बड़ा रोड़ा है।


लेस कैश से कैश लेस तक का सफर मोदी सरकार के लिए इतना आसान नही जितना अकसर बताया जाता है। डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए तमाम कदमों के बावजूद आज भी 95 फीसदी कार्डस का इस्तेमाल सिर्फ एटीएम से कैश निकालने के लिए हो रहा है। कारोबारियों की संस्था कैट के मुताबिक कंज्यूमर और ट्रेडर दोनों ही डिजिटल पेमेंट से दूर भाग रहे है। वजह है डेबिट कार्ड पर लगने वाला 1 फीसदी और क्रेडिट कार्ड पर लगने वाला 2 फीसदी ट्रांसजेक्शन चार्ज। इस चार्ज की भरपाई न तो व्यापारी करना चाहता है और न ही ग्राहक। व्यापारियों का मानना है ऑनलाइन पेमेंट करने पर सरकार की ओर से टैक्स रिबेट का प्रावधान होना चाहिए हालांकि लोगों को आकर्षित करने के लिए सरकार ने रिवार्ड सिस्टम भी शुरु किया था लेकिन भीम तक इसे सीमित करना गलत फैसला साबित हुआ।


अब कैट जल्द ही वित्त मंत्रालय और वाणिज्य मंत्रालय में डिजिटल पेमेंट पर व्य़ापारियों की राय पर तैयार की गई रिपोर्ट सौपेंगा। डिजिटल पेमेंट को सफल बनाने के लिए व्यापारियों की ओर से इस रिपोर्ट में बड़ी मांगे रखी गई है। जिसमें एनपीसीआई की रेगुलेटर और रु पे की ऑनरशिप की भूमिका अलग करना, ऑनलाइन पेमेंट पर इन्सेटिवस की व्यवस्था करना, डिजिटल पेमेंट अडोप्शन बोर्ड की स्थापना करना और पूरी पेमेंट इंडस्ट्री के लिए एक समान रिवार्ड स्कीम लागू करना शामिल है।


हालांकि कुछ इस तरह की -सिफारिशें पूर्व वित्त सचिव रत्तन वटट्ल कमिटी भी कर चुकी है। लेकिन सरकार ने अब तक इस पर गौर नही किया है। व्यापारियों का मानना है कि इन मांगों को पूरा किए बिना डिजिटल पेमेंट सिस्टम को कामयाब बनाना मुश्किल है।