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बढ़ सकता है ट्रेडिंग का वक्त: किसे नफा, किसका नुकसान

प्रकाशित Thu, 07, 2017 पर 08:58  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

बाजार में इस वक्त ट्रेडर्स से लेकर ब्रोकर्स तक परेशान हैं और उनकी परेशानी की वजह बाजार की गिरावट नहीं कुछ और है। जी हां, हम बात कर रहे हैं शेयर बाजार में ट्रेडिंग का समय बढ़ाने को लेकर, सोमवार को सेबी ने इस पर बैठक बुलाई है और उससे सबकी नींद उड़ी हुई है। लोगों को ये समझ नहीं आ रहा कि आखिर सेबी और एक्सचेंज ऐसा कर क्यों रहे हैं और इससे किसका फायदा होगा। आपकी इसी चिंता को रेगुलेटर तक पहुंचाने के लिए सीएनबीसी-आवाज़ चला रहा है खास मुहिम- मत बढ़ाओ, ट्रेडिंग का समय।


माना जा रहा है कि शेयर बाजार में ट्रेडिंग का वक्त और बढ़ सकता है। इस मुद्दे पर आने वाले सोमवार को सेबी की सेकेंडरी मार्केट एडवाइजरी कमिटी से मुलाकात होने वाली है जिसमें शाम 5 बजे या 7.30 बजे तक समय बढ़ाने की सिफारिश की जा सकती है।


इस बैठक बैठक में एक्सचेंज के एमडी, एनएसई ब्रोकर्स के प्रतिनिधि शामिल होंगे। बता दें कि बड़े ब्रोकरेज हाउस समय बढ़ाने के पक्ष में हैं वहीं छोटे ब्रोकरेज हाउस को इससे लागत बढ़ने का डर है। गौरतलब है कि 2009 में सेबी ने एक्सचेंजों को 5 बजे तक की मंजूरी दी थी। हालांकि 5 बजे के बाद के समय पर आरबीआई को कुछ दिक्कतें हो सकती हैं।


ग्लोबल मार्केट में ट्रेडिंग के वक्त पर नजर डालें तो अमेरिका में 09:30-16:00 तक 6.30 घंटे ट्रेडिंग होती है, वहीं जापान में 09:00-03:00 बजे तक 6 घंटे ट्रेडिंग होती है, जबकि हांगकांग में 09:30-16:00 बजे तक 6.30 घंटे ट्रेडिंग होती है।


भारत में 09:00-03:30 बजे तक 6.30 घंटे की ट्रेडिंग होती है। वहीं चीन में 09:30-11:30  और 13:00-15:00 कुल 4 घंटे ट्रेडिंग होती है। जबकि ऑस्ट्रेलिया में 10:00-04:00 बजे तक 6 घंटे ट्रेडिंग होती है।


सीएनबीसी-आवाज़ ने इस मुद्दे पर ब्रोकर्स के बीच एक पोल कराया है। जिसके मुताबिक सिर्फ 17 फीसदी ब्रोकर्स ट्रेडिंग का वक्त बढ़ाने के पक्ष में हैं जबकि इस पोल में भाग लेने वाले 83 फीसदी बोकर्स ट्रेडिंग का वक्त बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं।


क्या वक्त बढ़ने से ग्लोबल बाजारों से तालमेल बेहतर होगा? इस सवाल पर सिर्फ 17 फीसदी ब्रोकर्स का मानना है कि इससे ग्लोबल बाजारों से तालमेल बेहतर होगा। जबकि पोल में भाग लेने वाले 83 फीसदी ब्रोकर्स का कहना है कि इस कदम से ग्लोबल बाजारों से तालमेल में कोई बेहतरी नहीं आएगी।


पोल में भाग लेने वाले 54 फीसदी ब्रोकर्स के मुताबिक ट्रेडिंग का वक्त बढ़ने से एक्सचेंज को फायदा होगा। 32 फीसदी ब्रोकर्स का मानना है कि इससे बड़े ब्रोकर्स का फायदा होगा, 04 फीसदी ब्रोकर्स की राय है कि इससे छोटे ब्रोकर्स को भी फायदा होगा। वहीं पोल के 10 फीसदी भागीदारों का कहना है कि इससे निवेशक/ट्रेडर को फायदा होगा।


2009 से बीएसई, एनएसई 9 बजे से खुल रहे हैं, क्या इससे कोई फायदा हुआ? इस सवाल पर पोल में भाग लेने वाले 39 फीसदी ब्रोकर्स ने कहा कि इससे फायदा हुआ है जबकि 61 फीसदी भागीदारों ने कहा कि इससे कोई फायदा नहीं हुआ है।


अगर वक्त बढ़ाया गया तो आप क्या पसंद करेंगे 05:00 बजे शाम या 7:30 बजे शाम? इस सवाल पर शतप्रतिशत भागीदारों ने 05:00 बजे शाम के पक्ष में अपनी राय रखी। इस पोल में भाग लेने वाले 95 फीसदी ब्रोकर्स ने कहा कि वक्त बढ़ाने से कर्मचारियों की सेहत पर असर पड़ेगा, वहीं 30 फीसदी भागीदारों ने तो वक्त बढ़ाने की जगह इसमें कटौती करने की बात कही जबकि 70 फीसदी भागीदारों ने यथास्थिति बनाए रखने की वकालत की।