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योर मनीः कर्ज नहीं छोड़ता साथ, कैसे बचेगा बुढ़ापा

प्रकाशित Fri, 08, 2017 पर 13:03  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

रिटायरमेंट के बारें में हम अक्सर तब सोचते हैं, जब हम सारी जिम्मेदारियों से फारिक हो चुके होते हैं, फिर चाहें वो बच्चों की पढाई हो या शादी, लेकिन क्या इसके बाद भी आपको सुकून भरा रिटायमेंट मिल पाता है? शायद नही। और ऐसा इसलिए नही होता, क्योंकि आप रिटायरमेंट को एक आर्थिक लक्ष्य के तौर पर आखिर में सोचते हैं, बल्कि इसलिए क्योंकि भारतीयों की निवेश, कर्ज और बचत को लेकर समझ और आदतें, नही बदलते समय के हिसाब से मेल नही खाती हैं और नाही बढती मंहगाई के। योर मनी पर आरबीआई की ओर से जारी हाउसहोल्ड फाइनेंशियल रिपोर्ट में रिटायरमेंट को लेकर बारिकियों पर बात करेंगें और मेरे साथ इस चर्चा में हैं वाइस इन्वेस्ट एडवाइजर के हेमंत रूस्तगी।


दरअसल, आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक रिटायरमेंट प्लानिंग को लेकर भारत काफी पीछे है। भारत में केवल 13 फीसदी लोगों ने ही रिटायरमेंट प्लानिंग को महत्तव दिया है। क्योंकि अधिकतर भारतीय बच्चों के भरोसे अपने रिटायरमेंट प्लानिंग को नजरअंदाज करती है। एक ओर जहां रिटायरमेंट प्लानिंग में भारत अन्य देशों की तुलना में पीछे है वहीं प्रॉपर्टी और सोने में भारतीय नागरिक सबसे ज्यादा निवेश कर रहे है। रिपोर्ट के अनुसार कुल संपत्ति का 77 फीसदी भारतीय प्रॉपर्टी और 11 फीसदी सोने में निवेश करते है लेकिन फाइनेंशियल एसेट में महज 3 फीसदी निवेश कर रहे है।


आरबीआई के मुताबिक आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए भारतीय खूब कर्ज लेते हैं। सीनियर सिटिजन इलाज के लिए सबसे ज्यादा लोन लेते हैं। 56 फीसदी भारतीय अनसिक्योर्ड लोन लेते हैं। रिटायरमेंट के बाद भी लोन के जंजाल में फंसे होते हैं।


हेमंत रूस्तगी का कहना है कि निवेशक इन्वेस्टमेंट को लेकर किसी तरह की प्लानिंग नहीं करता और रिटायरमेंट प्लानिंग निवेशक के इन्वेस्टमेंट प्लान में नहीं रहता इसके कई कराण यह है कि निवेशकों में प्लानिंग की कमी रहती है। कुछ निवेशक इसलिए इन्वेस्टमेंट नहीं करते है क्योंकि उन्हें लगता है कि समय अधिक है। इन्हीं सभी के चलते लोगों में रिटायरमेंट के लिए प्लान नहीं करते।


आईबीआई हाउसहोल्ड रिपोर्ट के मुताबिक तकरीबन 44 फीसदी लोगों में रिटायर होने की कल्पना नहीं की होती है जबकि 33 फीसदी लोगों में रिटायरमेंट को लेकर किसी तरह का कोई प्लान नहीं करते। वहीं 10 फीसदी लोग रिटायरमेंट की योजना बना रहे हैं जबकि 13 फीसदी लोग रिटायरमेंट की पुख्ता प्लानिंग कर रहे है।


रिपोर्ट के अनुसार 52 फीसदी भारतीय रिटायरमेंट के बाद अपने बच्चों पर निर्भर करते है जबकि महज 26 फीसदी लोग खुद के बिजनेस पर आश्रित रहते है। वहीं 3 फीसदी लोग रियल एस्टेट, 4 फीसदी लोग फाइनेंशियल एसेट और 8 फीसदी भारतीय रिटायरमेंट के बाद अपने पीएफ के पैसे पर निर्भर होते है।