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आवाज़ अड्डा: बीजेपी का बुद्धिजीवियों पर दोहरे चरित्र का आरोप!

प्रकाशित Sat, 09, 2017 पर 15:17  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

देश और देश के 18 राज्यों में सरकार चला रही दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी ने देश के बुद्धिजीवियों और उदारवादियों पर सवाल उठाए हैं। यही नहीं बीजेपी ने कहा है कि तथाकथित लिबरल और बुद्धिजीवी बीजेपी, आरआसएस के प्रति भेदभाव रखते हैं। इस बयान की जड़ में है पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के बाद छिड़ी बहस। गौरी की हत्या के बाद सोशल मीडिया पर बीजेपी, आरएसएस को निशाने पर लिया गया तो गौरी लंकेश की हत्या को उचित ठहराने वालों और उनका कैरेक्टर असैसिनेशन करने वालों की भी कमी नहीं थी। ऐसे में बुद्धिजीवियों पर आरोप लगाने का क्या मतलब है और क्या इस आरोप में वाकई कोई दम है। अड्डा में आज इसी पर चर्चा करेंगे, लेकिन उससे पहले देख लेते हैं कि केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बीजेपी की तरफ से बुद्धिजीवियों पर क्या आरोप तय किए हैं।


गौरी लंकेश की हत्या पर मचे बवाल के बीच बीजेपी ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्टी की तरफ से केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने देश के उन बुद्धिजीवियों और उदारवादी लोगों से सवाल किए हैं जो गौरी लंकेश की हत्या को लेकर तरह-तरह के सवाल खड़े कर रहे हैं। बीजेपी का आरोप है कि केरल, कर्नाटक में सरकारों की शह पर बीजेपी, आरएसएस कार्यकर्ता हिंसा का शिकार हो रहे हैं, उनकी हत्या हो रही है, लेकिन बुद्धिजीवी उसके खिलाफ नहीं बोलते। बीजेपी के मुताबिक ये खामोशी एक साजिश है।


यही नहीं, बीजेपी कह रही है कि देश के बुद्धिजीवी हिंसा, अभिव्यक्ति की आजादी, असहमति के अधिकार की बात करते हुए बीजेपी, आरएसएस के साथ पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाते हैं। वो नक्सलियों तक के मानवाधिकारों की वकालत करते हैं, लेकिन बीजेपी, आरएसएस के नाम पर दोहरा चरित्र दिखाते हैं।


सवाल उठता है कि क्या बीजेपी के आरोपों में दम है या वो गौरी लंकेश की हत्या से उठ रहे सवालों से ध्यान हटाने के लिए ये सवाल उठा रही है? क्या देश के बुद्धिजीवी आरएसएस, बीजेपी के प्रति दोहरा रवैया रखते हैं? अगर नहीं तो फिर सवाल उठता है कि बीजेपी, आरएसएस बार-बार जिस हिंसा और हत्याओं की बात करते हैं, वो चर्चा के केंद्र में क्यों नहीं आती हैं!