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पहरेदार में बेचैन घर खरीदारों की आवाज़

प्रकाशित Mon, 11, 2017 पर 11:05  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सीएनबीसी-आवाज़ पर आने वाला टीवी का सबसे बड़ा कंज्यूमर शो पहरेदार ग्राहक की आवाज़ बुलंद करता है और लड़ता है ग्राहक के हक की लड़ाई। जब कंपनियों की मनमानी के सामने कंज्यूमर झुकने लगता है, तब उनके हक की आवाज़ लेकर पहरेदार करता है कंपनी से सवाल और कंपनी को देना होता है जवाब। पहरेदार के जरिए उन लोगों को इंसाफ मिल पाता है जो कंपनियों के अड़ियल रवैये के चलते उन जरूरी सर्विसेज से महरूम रह जाते हैं जो उनका हक है। पहरेदार उन कंपनियों को भी सबक सिखाता है जो वादे तो कर देती हैं लेकिन उन्हें पूरे करने में आनाकानी करती हैं।


पहरेदार यहां उठा रहा है देश के घर खरीदारों की आवाज़। घर खरीदने के बाद देश में घर खरीदार बेचैन है, क्या होगा उनके घर के सपनों का, क्या घर के मोटे-मोटे एग्रीमेंट पेपर महज रद्दी पेपर बन गए हैं, बिल्डर की जगह घर दिलाने का जिम्मा लॉ ट्रिब्यूनल या कोर्ट ने ले लिया है!


फाईट फॉर रेरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक हरियाणा में 48 प्रोजेक्ट्स देरी से चल रहे हैं। महाराष्ट्र में 38 प्रोजेक्ट देरी से चल रहे हैं। बंगलुरु के 43 प्रोजेक्टस देरी से चल रहे हैं। मोहाली के 8 प्रोजेक्टस देरी से चल रहे हैं।


इस मुद्दे पर जानकारों का कहना है कि रेरा कानून को सख्ती से लागू नहीं किया गया है। बिल्डर और नेताओं ने मिलकर कानून लागू करने में ढिलाई बरती है। कई राज्यों में चालू प्रोजेक्ट रेरा से बाहर रखे गए हैं। चालू प्रोजेक्ट्स को रेरा से बाहर रखना गलत है।


बिल्डर के दीवीलिया होने का सबसे बड़ा नुकासान घर खरीदार को होगा, बिल्डरों के पास बैंकों से ज्यादा ग्राहकों के पैसे फंसे हुए हैं। एनसीएलटी और सरकार को घर खरीदारों के हक का ख्याल रखना चाहिए। बैंक से ज्यादा घर खरीदारों के हित को देखना जरूरी है। राज्य सरकारों द्वारा की जा रही हीला-हवाली को देखते हुए इस मामले में केंद्र सरकार को भी दखले देना चाहिए।