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रेरा के बावजूद बिल्डर्स की मनमानी, कब रुकेगी धोखाधड़ी!

प्रकाशित Fri, 15, 2017 पर 18:46  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

रेरा नियम लागू होने के बावजूद रेरा नियम में हेराफेरी हो रही है। बिल्डर घर खरीदारों के डिलीवरी की तारीख बदल रहे है। साथ ही खरीदारों को अलग तारीख दे रहे है और रेरा में अलग तारीख दे रही है। बिल्डरों द्वारा ग्राहकों और रेरा में दिए प्लान में अंतर है। वहीं प्रोजेक्ट की सुविधाओं की जानकारी में अंतर पाया जा रहा है। बिल्डर द्वारा इस बदलाव को लेकर कई ग्राहक शिकायत भी कर रहे है।


एक ऐसा ही मामला जेपी ग्रीन्स केंसिंगटन अपार्टमेंट्स का है। जहां बिल्डर ने घर खरीदारों को अगस्त 2013 का वक्त दिया था। बिल्डर की और से अगस्त 2013 तक प्रोजेक्ट पूरा होना था लेकिन रेरा में बिल्डर ने तारीख दिसंबर 2019 बताई है। वहीं नोएडा एक्सटेंशन में 14 अवेन्‍यू गौड़ सिटी प्रोजेक्‍ट 2017 में पूरा होना था लेकिन रेरा में बिल्डर ने तारीख तारीख 2023 बताई है।


इस मामले में आम्रपाली के खरीदारों को भी बड़ी शिकायतें आई है। आम्रपाली के प्रोजेक्ट से सबसे ज्यादा शिकायतें डिलीवरी तारीख को लेकर आई है। इतना ही नहीं घर के प्लान और खराब कंस्ट्रक्शन को लेकर भी कई तरह की शिकायतें मिले है।


दरअसल, रेरा को लेकर अभी भी कई तरह का कंफ्यूजन बना हुआ है। कई प्रोजेक्ट 5-7 साल की देरी से चल रहे हैं। प्रोजेक्ट कब तक पूरे होंगे इस पर कोई सफाई नहीं है। लेकिन सेल एग्रीमेंट में दी गई तारीख अंतिम मानी जाएगी। इस तारीख के मुताबिक बिल्डर को पजेशन देना होगा और प्रोजेक्ट में देरी पर बिल्डर्स को पेनल्टी देनी होगी।


रेरा नियम के तहत सभी प्रोजेक्ट का रेरा में रजिस्ट्रेशन जरूरी है। रेरा नियम के तहत बिल्डर को अपने प्रोजेक्ट की सही जानकारी देना होगा। बिल्डर्स यह जानकारी अपनी वेबसाइट पर देगें। रेरा के तहत 60 फीसदी प्रोजेक्ट बुकिंग पर बनेगी। बिल्डर को सोसायटी को तीन महीने के अंदर प्रॉपर्टी देनी होगी। खरीदारों के पूरी रकम देने के बाद ट्रांसफर मिलेगा। तीसरी बार ईएमआई डिफॉल्ट होने पर ही एग्रीमेंट रद्द कर दिया जायेगा।