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लंबे निवेश के लिए क्या है जरूरी, सीखें निवेश के सही मंत्र

प्रकाशित Sat, 16, 2017 पर 13:44  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

अक्सर हम बड़े जोश के साथ निवेश की शुरुआत करते हैं, बड़े-बड़े लक्ष्य तय करते हैं लेकिन हममे से कई सारे निवेशक निवेश के रास्ते में चलते-चलते कहीं खो जाते हैं। बाजार के छोटे-मोटे झटके भी हौसला तोड़ देते हैं। कभी लालच में फंसकर हम अपने लॉन्ग टर्म गोल को कुर्बान कर देते हैं। हम निवेश के दौरान आने वाली कुछ बड़ी अड़चनों की चर्चा करेंगे और बताएंगे की इससे कैसे निपटा जाए। निवेश का रास्ता लंबा है, रुकावटे काफी है लेकिन अगर मंजिल पानी है तो अनुशासित रहना जरूरी है। इसी पर बातचीत करने के लिए हमारे साथ हैं वाइजइंवेस्ट एडवाइजर्स के डायरेक्टर हेमंत रूस्तगी।


हेमंत रूस्तगी का कहना है कि सही एसेट एलोकेशन नहीं कर पाना, निवेश को तय वक्त तक जारी ना रख पाना, बाजार के उतार-चढ़ाव से घबरा जाना, ज्यादा रिटर्न मिलने पर मुनाफावसूली, पैसे की जरूरत होने पर निवेश रोक देना, इमरजेंसी फंड ना होने से निवेश पर असर, छोटी जरूरतों के लिए बड़े लक्ष्य को छोड़ देना और जरुरत के हिसाब से पोर्टफोलियो में बदलाव नहीं कर पाना यह सभी निवेश के रास्ते की बड़ी अड़चनें साबित होती है।


जिसके लिए निवेशकों को चाहिए कि वह एक अनुशासित निवेशक की खूबियां को सीखें और अपने निवेश की परेशानियों का दूर करें। हेमंत रूस्तगी ने आगे कहा कि निवेशक इन सभी परेशानियों से बचने के लिए सबसे पहले निवेश का लक्ष्य और अवधि तय करें और लक्ष्य के हिसाब से सही एसेट एलोकेशन में निवेश करें। क्योंकि सही एसेट एलोकेशन ही निवेश की नींव है। निवेश से पहले अपनी रिस्क क्षमता को पहचान भी उतना ही जरुरी है। साथ ही समय-समय पर पोर्टफोलियो की समीक्षा करते रहें।


हेमंत रूस्तगी के अनुसार रिस्क और रिटर्न का बैलेंस समझें। निवेशक अपनी क्षमता से ज्यादा रिस्क ना लें। ज्यादा रिटर्न के चक्कर में आकर ज्यादा रिस्क से बचें। एसेट एलोकेशन रिस्क लेने की क्षमता के हिसाब से करें।


निवेशक अपने पोर्टफोलियो का सही डावर्सिफिकेशन करें। जिसके लिए निवेशक अपने पोर्टफोलियो में बहुत सारे फंड नहीं होने चाहिए। बहुत सारे फंड होने से उनकी समीक्षा मुश्किल होती है। पोर्टफोलियो में एक कैटेगरी के बहुत सारे फंड्स ना हों। ध्यान रहें हर अच्छे रिटर्न वाले फंड में निवेश जरूरी नहीं है।  सारे फंड्स की परफॉर्मेंस एक जैसी नहीं होती है। फंड की परफॉर्मेंस बेंचमार्क से तुलना करें।


हेमंत रूस्तगी के मुताबिक निवेशक बाजार के उतार-चढ़ाव से घबराएं नहीं। नए निवेशक अपने लक्ष्य पर ध्यान दें। बाजार के उतार-चढ़ाव से घबराए बिना निवेश जारी रखें। पोर्टफोलियो को शॉर्ट टर्म के नजरिए से ना देखें बल्कि फंड को परफॉर्म करने का मौका दें। लंबे वक्त तक बेंचमार्क से नीचे रिटर्न पर ही निवेश स्विच करें।



जल्दी पैसा कमाने के लिए बार बार एसेट एलोकेशन ना बदलें। शॉर्ट टर्म फायदे के लिए लंबी अवधि के निवेश से छेड़छाड़ ना करें क्योंकि शॉर्ट टर्म में बाजार के उतार-चढ़ाव को समझना मुश्किल है। लंबे समय में उतार-चढ़ाव का असर कम रहेगा। फंड स्विच करनें में जल्दीबाजी ना करें।