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पहरेदार: ऑनलाइन शॉपिंग, जरा बच के

प्रकाशित Sat, 30, 2017 पर 17:01  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सीएनबीसी-आवाज़ पर आने वाला टीवी का सबसे बड़ा कंज्यूमर शो पहरेदार ग्राहक की आवाज़ बुलंद करता है और लड़ता है ग्राहक के हक की लड़ाई। जब कंपनियों की मनमानी के सामने कंज्यूमर झुकने लगता है, तब उनके हक की आवाज़ लेकर पहरेदार करता है कंपनी से सवाल और कंपनी को देना होता है जवाब।


पहरेदार के जरिए उन लोगों को इंसाफ मिल पाता है जो कंपनियों के अड़ियल रवैये के चलते उन जरूरी सर्विसेज से महरूम रह जाते हैं जो उनका हक है। पहरेदार उन कंपनियों को भी सबक सिखाता है जो वादे तो कर देती हैं लेकिन उन्हें पूरे करने में आनाकानी करती हैं।


त्यौहारी सीजन की शुरुआत होते ही ऑनलाइन सेल का भी मेला लग जाता है। लेकिन, जब आप धुंआधार शॉपिंग का प्लान बना रहे हैं तो जरूरी है कि ऑनलाइन शॉपिंग के साइड इफेक्ट्स भी जानें। देश में हर रोज लाखों लोग ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट का इस्तेमाल करते हैं और आने वाले साल में इस संख्या में काफी बढ़ोतरी भी होना तय है। एक अनुमान के मुताबिक 2021 तक ऑनलाइन शॉपिंग का कारोबार 4.20 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। लेकिन, बढ़ते कारोबार के साथ इन वेबसाइटों के खिलाफ शिकायतें भी बढ़ी हैं।


जनवरी 2017 से अब तक ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइटों के खिलाफ 50,337 शिकायतें दर्ज की गई हैं। वहीं, नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक ऑनलाइन शॉपिंग के खिलाफ सबसे ज्यादा 50.02 फीसदी शिकायतें डिलीवरी में गड़बड़ी को लेकर की गई हैं। नकली सामान या झूठे ऑफर को लेकर 20.66 फीसदी और 29.32 फीसदी अन्य शिकायतें दर्ज की गई हैं।


कंज्यूम एक्टिविस्ट, बिजॉन राय का कहना है कि शिकायतों को लेकर ऑनलाइन वेबसाइट अपना पल्ला नहीं झाड़ सकती हैं। ऑनलाइन वेबसाइट खुद को मार्केट प्लेस कहकर अपनी जिम्मेदारी ना बचें, बल्कि सही सामान कंज्यूमर को पहुंचे इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।


वहीं साइबर लॉ एडवोकेट, कर्णिका सेठ का कहना है कि मौजूदा कंज्यूमर कानून ऑनलाइन खरीदारों के हितों की रक्षा नहीं कर पा रहा है। ऑनलाइन खरीदारों को ठगी से बचाने के लिए नई गाइडलाइंस की जरूरत है। साथ ही ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट को अपने सेलर की भी अच्छे से जांच-परख करनी चाहिए।