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कचरे पर किचकिच, बीएमसी नहीं उठाएगी कचरा

प्रकाशित Tue, 03, 2017 पर 18:28  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

मुंबई में आज से बीएमसी ने गीला कचरा उठाना बंद कर दिया है। कारण है कॉरपोरेशन का वो आदेश जिसके मुताबिक शहर की हाउसिंग सोसायटीज को अपने यहां 2 अक्टूबर पर गील कचरे के लिए कंपोस्ट मशीन लगानी थी और ऐसा न होने पर बीएमसी को कम से कम एक प्लान सौंपना था। लेकिन अब क्या होगा, कहां जाएगा गीला कचरा अगर बीएमसी भी नहीं उठाएगी, आखिर क्यों अभी तक सोसायटीज में कंपोस्ट मशीने नहीं लगी हैं और सबसे बड़ा सवाल कि ये जिम्मेदारी आखिर किसकी है।


दरअसल, बीएमसी ने कंपोस्ट मशीन उन हाउसिंग सोसायटी को लगाने का आदेश दिया था जो 20,000 स्कयावर मीटर से ज्यादा बड़ी है यानि जिन हाउसिंग सोसायटी से रोजाना 100 किलो से ज्यादा कचरा निकलता है उन्हें कंपोस्ट मशीन लगानी है।
 
बीएमसी ने अपने आदेश में कहा था कि गीला और सूखा कचरा अलग किया जाए। बीएमसी सिर्फ सूखा कचरा उठाएगी और गीले कचरे के लिए सोसायटी को कंपोस्ट मशीन लगानी होगी। ताकि कंपोस्ट मशीन से खाद बनाकर इस्तेमाल किया जा सकें। लेकिन हाउसिंग सोसायटी की अपनी दलीलें है। सोसायटी का कहना है कि कंपोस्ट प्लांट लगाना काफी महंगा काम है और इससे बदबू भी आती है। साथ ही उन सोसायटी में कंपोस्ट प्लांट के लगाने के लिए जगह की कमी भी है।


बता दें कि बायो डिग्रेडेबल कूड़ा, बचा हुआ खाना, सब्जी, फल के छिलके, लकड़ी का बुरादा, भूसा, पत्ते, खराब फल और चाय पत्ती यह सभी गीला कचरा मे आता है जबकि कागज, गत्ता, टैट्रापैक, प्लास्टिक के डिब्बे, बोतल,टिशू, थर्मोकोल, कार्डबोर्ड, दवाइयों के रैपर, फूड पैकेजिंग सभी  सूखा कचरा है।