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बदली पी2पी लेडिंग की गाइडलाइन, किसे मिलेगा फायदा

प्रकाशित Fri, 06, 2017 पर 19:59  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

निवेश की राह मुश्किल नही, लेकिन संयम और धीरज मांगती है। योर मनी पर हम आपकी आर्थिक जरूरत से जुडी खबरों से करवाते हैं रूबरू साथ ही देते हैं निवेश की रणनिती। आज मेरे साथ हैं फाइनेंशियल प्लानर अर्णव पंड्या।


पी2पी लेंडिंग की नई गाइडलाइन के तहत अब कंपनियां केवल खुद लोन नही देंगी बल्कि पी2पी कंपनिया सिर्फ लेनदार और देनदार को मिलाने का काम करेंगी। लेकिन इसमें 36 महीने से ज्यादा के लिए लोन नहीं मिल सकेगा। साथ ही देनदार और लेनदार के लिए लिमिट तय की जायेगी।


पी2पी लेंडिंग यानी पीयर टू पीयर लैंडिंग, बिना वित्तीय संस्थान के कर्ज लेनदेन का तरीका होता है।यह पी2पी प्लेटफॉर्म लेनदार और देनदार को जोड़ता है। कर्ज देने वाले को बाजार भाव से ज्यादा ब्याज मिलता है।पी2पी लोन की आसान और पारदर्शी प्रक्रिया है। हाल के दिनों में पी2पी लेंडिंग तेजी से बढ़ी है।


लेंडिंग रेट तय करने के लिए ग्राहकों को रेट कट का फायदा मिले इसके लिए आरबीआई एक व्यवस्था बनाएगा। एक बेंचमार्क के जरिए लेंडिंग रेट तय किए जाएंगे। पॉलिसी रेट, डिपॉजिट रेट और ट्रेजरी बिल रेट के आधार पर ब्याज दिया जाएगा।


वहीं दूसरी और निवेश के तमाम विकल्पों में से भारतीयों को सबसे ज्यादा प्रिय फिक्स्ड डिपॉजिट है। कुछ दिन पहले हमने देखा, एसबीआई ने अपने एक साल के डिपॉजिट की दर 6.75 फीसदी से घटाकर 6.50 फीसदी कर दी है। और आगे चलकर, हो सकता है हम बाकी बैंकों को भी ये करता देखें। लेकिन आशा की किरन यहां ये है की छोटी अवधि के लिए अगर आप डिपॉजिट करना चाहते हैं तो, यही मौका है, क्योंकि लंबी अवधि के मुकाबले, छोटी अवधि के एफडी पर ब्याज ज्यादा दिया जा रहा है।