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आवाज़ अड्डा: गुजरात चुनाव में मोदी-शाह की परीक्षा

प्रकाशित Mon, 09, 2017 पर 20:32  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

कुछ दिन में गुजरात चुनाव की तारीखों का एलान हो जाएगा। गुजरात में कांग्रेस 22 साल से सत्ता से बाहर है और 2002 के बाद से मोदी-अमित शाह की जोड़ी लगभग अजेय है। इन दिनों नोटबंदी, जीएसटी और इकोनॉमी की बिगड़ी हालत को लेकर केंद्र सरकार चिंता में है तो राहुल गांधी कांग्रेस की कमान लेने जा रहे हैं। ऐसे में आज कल गुजरात में दो नारे चल रहे हैं। विपक्ष का पहला नारा है कि विकास गांडो थयो छे यानि विकास पागल हो गया है। तो इसके जवाब में बीजेपी का नारा है कि हू विकास छू, हू छू गुजरात यानि मैं विकास हूं, मैं हूं गुजरात। दरअसल गुजरात चुनाव में कांग्रेस बीजेपी के आर्थिक मॉडल को दलितों, आदिवासियों, किसानों, बेरोजगारों और छोटे व्यापारियों के खिलाफ बता रही है। जबकि बीजेपी विकास पर के मुद्दे पर ही चुनाव लड़ने की तैयारी में है। राज्य में पटेलों और दलितों के आंदोलन ने भी राजनीति को लेकर कई सवाल पैदा किए हैं। बीजेपी नहीं चाहती कि गुजरात में उसकी ताकत थोड़ी सी भी घटे और विपक्ष को मौका मिले। यही वजह है अगर राहुल गांधी गुजरात में माहौल बनाने में जुटे हैं तो बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी माहौल बरकार रखने में कोई कसर बाकी नहीं रख रहे।


प्रधानमंत्री मोदी का 3 साल में ये 17वां और इस साल का 7वां और 1 महीने के अंदर तीसरा गुजरात दौरा है। इसके अलावा बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के लगातार गुजरात के दौरे। साफ है कि शाह और मोदी की जोड़ी गुजरात में विपक्ष को कोई मौका नहीं देना चाहती। 2014 लोकसभा चुनाव में बीजेपी को गुजरात में 60 फीसदी वोट और सभी 26 सीटें मिली थीं। विधानसभा चुनाव में बीजेपी के सामने कम से कम पिछला प्रदर्शन बरकरार रखने की चुनौती है। सीटें 116 से कम हुईं तो विपक्ष इसे मोदी के घटते जनाधार से जोड़कर प्रचारित करेगा। राज्य में आरक्षण पर पटेल-पाटीदार और ओबीसी के बीच विभाजन है। दलित और आदिवासियों के बीच असंतोष है। नोटबंदी और जीएसटी ने बीजेपी के कोर वोटर व्यापारियों को नाराज किया है। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी को भरोसा है कि जिस गुजरात ने उन्हें सबसे बड़े पद तक पहुंचने की ताकत दी है, वो उनका साथ नहीं छोड़ेगा।


इधर द्वारका से चुनाव अभियान की शुरुआत करने वाले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी बीजेपी को रोजगार, किसानों, व्यापारियों की तकलीफ जैसे आर्थिक मुद्दों पर घेर रहे हैं तो प्रधानमंत्री मोदी की कार्यशैली पर सीधे हमले कर रहे हैं। मगर तमाम असंतोष के बावजूद गुजरात में शाह और मोदी खासी मजबूत दिखाई देती है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या राहुल गांधी बीजेपी को कड़ी टक्कर दे पाएंगे!