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आवाज़ आंत्रप्रेन्योर: डेली डंप ने दिया कचरे की समस्या का हल

प्रकाशित Sat, 04, 2017 पर 18:05  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

मुंबई में हाल ही में बीएमसी ने एक फरमान जारी किया की हाउसिंग सोसाईटी गीला कचरा इकट्ठा नही करेंगे और सोसाईटी को अपने गीले कचरे की कंपोस्टिंग शुरू करनी चाहिए। मुंबई देर से जागी हैं, गीला और सूखे कचरे को अलग कर ठिकाने लगाने का काम बंगलूरू जैसे शहर सालों से कर रहे हैं और सिटिजन खुद अपने किचन से निकल रहें गीले कचरे का इस्तमाल कर रहें हैं। अगर आप सोच रहें हैं ये बिना बदबू और गंदगी से कैसे हो सकता हैं तो इसका जबाव हैं डेली डंप।


रोजाना हम कई दिक्कतों से गुजरते है, पानी की कमी, महंगी बिजली, ट्रान्सपोर्टेशन की समस्या, कचरे के लगे ढेर, खराब रास्ते, रास्ते में गढ़्डे ये लिस्ट इतनी लंबी है की लगता है खत्म ही नही होगी। इस सबके लिए प्रशासन और सरकार को दोषी ठहराते हुए हम वापस अपने काम में जुट जाते है। लेकिन सब एक जैसे नहीं होते हम सब में कई ऐसे है जो अलग सोच के साथ आगे बढ़ रहे है। शहरों में कचरे की समस्या दिन ब दिन बढ़ती जा रही है। इसे इकठ्ठा करने से नष्ट करने या डिकंपोस्ट करने में भारी खर्चा भी आता है, लेकिन क्यों ना इसे घर में ही डिकंपोस्ट किया जाए, ये कॉन्सेप्ट धीरे-धीरे जोर पकड़ रहा है और इसे शहरों के घरों में पहुंचा रहे है स्टार्टअप्स।


खूबसूरत पॉटरी आपके घर में सजावट के लिए नहीं है बल्की एक बड़ी सामाजिक समस्या सुलझाने के काम आ रही है। दरअसल ये होम कंपोस्टर है। इसमें आपके घर का कचरा 4 दिन में डिकंपोज हो जाता है। कचरे को खुबसूरती से रियूज करने के पिछे की कलाकार है पूनम बीर कस्तूरी।  कचरे की तरफ देखने के नजरीए में बदलाव लाना पूनम का उद्देश्य था। इस अलग सोच में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइनिंग की शिक्षा इनके काम आई और वेस्ट मैनेजमेंट क्रिएटीव अंदाज में पेश हुआ पूनम के स्टार्टअप डेली डम्प के जरीए। कंपनी का मुख्य प्रोडक्ट है टेराकोटा से बना ये पॉट है। इसका नाम है खंबा, किचन में जमा होने वाले कचरे का इसमें जमा करके इसपर रिमिक्स पावडर छिड़कना होता है और 40 दिन में ये कचरा खाद बन जाता है। खास बात ये है की इस प्रोसेस में ने कोई गंदगी फैलती हैं और न ही कोई बदबू आती हैं।


पर्यावरण का संतुलन, सामाजिक समस्याओं का हल और बिजनेस इन तीनों के मेल से स्वच्छ और सुंदर भारत का सपना पूरा किया जा सकता है, ये विश्वास स्टार्टअप्स पैदा कर रहे है और इस दिशा में अलग-अलग सेक्टर में मौके उभर रहे है। नए आंत्रप्रेन्योर्स को जरुरत है इन मौकों को तराश ने की।