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ई-वॉलेट में फंसे पैसे, पहरेदार की पहल से वापस मिली रकम

प्रकाशित Mon, 06, 2017 पर 12:40  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सीएनबीसी-आवाज़ पर आने वाला टीवी का सबसे बड़ा कंज्यूमर शो पहरेदार ग्राहक की आवाज़ बुलंद करता है और लड़ता है ग्राहक के हक की लड़ाई। जब कंपनियों की मनमानी के सामने कंज्यूमर झुकने लगता है, तब उनके हक की आवाज़ लेकर पहरेदार करता है कंपनी से सवाल और कंपनी को देना होता है जवाब।


पहरेदार के जरिए उन लोगों को इंसाफ मिल पाता है जो कंपनियों के अड़ियल रवैये के चलते उन जरूरी सर्विसेज से महरूम रह जाते हैं जो उनका हक है। पहरेदार उन कंपनियों को भी सबक सिखाता है जो वादे तो कर देती हैं लेकिन उन्हें पूरे करने में आनाकानी करती हैं।


आज से करीब 1 साल पहले 8 नवंबर को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी का एलान किया था। इस एलान के बाद साइडलाइन पर रहने वाले डिजिटल वॉलेट मेनस्ट्रीम हो गए। रोजमर्रा के लेनदेन में डिजिटल वॉलेट का इस्तेमाल काफी बढ़ गया। कैपेजमिनी की एक रिपोर्ट के मुताबिक 5 साल में डिजिटल वॉलेट का कारोबार करीब 4.5 अरब डॉलर का हो जाएगा। आरबीआई भी डिजिटल पेमेंट और आसान बनाने के लिए लगातार कई कदम उठा रहा है।


हालांकि, इस सबके बीच अगर आपके इस वॉलेट के लेनदेन में कुछ गड़बड़ी हो जाए तो इन कंपनियों का कंज्यूमर के प्रति कैसा रवैया रहता है। सूरत के कैलाश बंसल की आपबीती से यह हमारे सामने आया है। कैलाश ने एचडीएफसी बैंक के पेजैप वॉलेट में 10,000 रुपये जमा किए। कैलाश ने 5,000 रुपये का ट्रांजैक्शन किया लेकिन 10,000 रुपये कट गए। एक ही ट्रांजैक्शन के बाद कैलाश का वॉलेट खाली हो गया।


कैलाश ने गलत ट्रांजैक्शन की शिकायत बैंक से की। बैंक ने 24 घंटों में शिकायत पर हुई कार्रवाई की जानकारी देने का वादा किया। हालांकि 5 दिन तक बैंक से कोई जानकारी नहीं मिली। कैलाश की बैंक से बात करने की कोशिश विफल रही। कैलाश को लगा कि कोई भी कार्रवाई नहीं होने पर अब रकम वापस नहीं मिलेगी। लेकिन, कैलाश के पहरेदार से शिकायत करने और पहरेदार की ओर से पहल करने के बाद बैंक ने रकम वापस कर दी।