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नोटबंदी का एक साल, क्या है हाल!

प्रकाशित Mon, 06, 2017 पर 19:34  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

नोटबंदी के बाद डिजिटल ट्रांजैक्शन तेजी से आगे बढ़ा। हर गली नुक्कड़ की दुकानों पर डिजिटल पेमेंट धड़ल्ले से शुरू हो गए लेकिन नोटंबदी के एक साल में ही फिर से लोग कैश में लेन देन पर लौट आए हैं यानी डिजिटल ट्रांजैक्शन में ठहराव आता दिख रहा है। 


ये हैं पान के लिए मशहूर नोएडा के गंगा मार्केट के मदन। नोटबंदी के दौरान बड़े उत्साह से इन्होंने मोबाइल वॉलेट पेटीएम लगवाया। इसका फायदा भी मिला। लेकिन वक्त बीतने के साथ लोगों की जेब में नकदी आने लगी और अब पेटीएम इनके लिए जी का जंजाल बन गया।


दिल्ली के खान मार्केट के अनुराग को तो एक ग्राहक ने ऐसा झांसा दिया कि उन्होंने मोबाइल वॉलेट से तौबा ही कर लिया। कमोवेश यही हाल आपको छोटे मोटे दूसरे दुकानों पर भी देखने को मिलेंगे। 


सिर्फ दुकानदार ही नहीं बल्कि कैश पैसे आने के बाद आम लोगों में भी मोबाइल वॉलेट का क्रेज खत्म हो रहा है। 


दरअसल नोटबंदी के दौरान मजबूरी में लोगों ने अलग-अलग तरह के डिजिटल पेमेंट के तौर तरीके अपनाए। नोटबंदी के पहले वाले महीने यानी अक्टूबर के मुकाबले दिसंबर में मोबाइल वॉलेट के ट्रांजैक्शन में 117 फीसदी का उछाल देखने को मिला। लेकिन उसके बाद इसमें ठहराव आ गया। दिसंबर के मुकाबले इस साल अगस्त में मोबाइल वॉलेट ट्रांजैक्शन में सिर्फ 1.35 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली। इसी तरह अक्टूबर से दिसंबर के बीच प्रीपेड इंस्ट्रक्शन यानि पीपीआई में 63 फीसदी बढ़ोतरी आई तो दिसंबर से अगस्त के बीच सिर्फ 5 फीसदी। डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन जहां नोटबंदी के दौरान 48 फीसदी कम हो गया वहीं वो दिसंबर से अगस्त तक 99 फीसदी बढ़ गया।


डिजिटल ट्रांजैक्शन की रफ्तार बनी रहे इसके लिए जरूरी है कि बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो और डिजिटल ट्रांजैक्शन पर चार्ज कम किए जाएं।


कारोबारी भले ही डिजिटल ट्रांजैक्शन को लेकर शिकायतें कर रहे हों लेकिन नोटंबदी के एक साल बाद बैंकर्स का मानना है कि नोटबंदी ने सोच बदली है और अब 60 फीसदी ज्यादा डिजिटल ट्रांजैक्शन हो रहे हैं। हालांकि बैंकर्स का मानना है कि डिजिटल ट्राजैक्शन बढ़ाने के लिए बहुत कुछ किया जाना है।


बैंकर्स का कहना है कि नोटबंदी के बाद बैंकों के पास ज्यादा पैसा आया है। नोटबंदी टैक्स का दायरा बढ़ाने में मददगार रही है। लंबी अवधि में नोटबंदी का अच्छा असर दिखेगा। नोटबंदी से बचत का इस्तेमाल अच्छी तरह से होने लगा है और बचत के इस्तेमाल के तरीकों में भी बदलाव आया है।