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आवाज अड्डाः पैराडाइज पेपर्स का धमाका, किश्तों में होगा खुलासा!

प्रकाशित Mon, 06, 2017 पर 20:52  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

पनामा पेपर्स के बाद पैराडाइज पेपर्स। नोटबंदी की सालगिरह से 2 दिन पहले एक बड़ा खुलासा हुआ है जिसने दुनिया के कई देशों में खलबली मचा दी है। खुलासा ये है कि देश का बहुत सारा काला धन टैक्स बचाने के लिए विदेश यात्रा पर जाता है। भारत में ही नहीं पूरी दुनिया में। खोजी पत्रकारों के अंतरराष्ट्रीय संगठन आईसीआईजे ने 2 ऐसी कंपनियों के दस्तावेज लीक किए हैं जो दुनियाभर के अमीर और ताकतवर लोगों को कंसल्टेंसी देती हैं। इस लिस्ट में शामिल लोगों की संख्या के हिसाब से भारत 19वें नंबर पर आता है। लिस्ट में सत्ता, विपक्ष और कॉर्पोरेट दुनिया के 714 नाम भारत से हैं।


सरकार ने आज ही इसपर जांच शुरू करने का भी एलान कर दिया। हालांकि ये खुलासा करने वाली संस्था, इंटरनेशनल कंसोर्सियम ऑफ इंवेस्टिगेटिव जर्निस्ट्स का कहना है कि हो सकता है कि सारे लेनदेन कानून के दायरे में ही हुए हों। लेकिन सवाल ये पैदा होता है कि क्या सिर्फ टैक्स बचाने के लिए इतनी कसरत की गई है या ये काले को सफेद करने, मनी लाउन्ड्रिंग और जालसाजी के मामले हैं। विदेश में खोखा कंपनी या शेल फर्म बनाकर किस नियत से पैसे जमा कराए गए। क्या विदेश में ब्लैक मनी को खत्म करने के लिए लंबा सफर बाकी है। जांच से क्या कुछ निकलेगा भी?


पैराडाइज पेपर्स भारत की एजेंसियों के लिए बहुत बड़ा सूत्र साबित हो सकता है। दो अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों बरमूडा की एप्पलबी, सिंगापुर की एशियासिटी से मिले दस्तावेजों के मुताबिक कम से 714 भारतीय कंपनियों और व्यक्तियों ने टैक्स बचाने या चोरी करने, एस्क्रो अकाउंट खोलने, कम टैक्स देकर रियल एस्टेट, एयरप्लेन और यॉट खरीदने औैर पैसा खपाने के लिए उनकी सेवाएं ली हैं।


पैराडाइज पेपर्स की पूरी रिपोर्ट अलग-अलग किस्तों में सामने लाई जाएंगी। लेकिन अभी तक हुए खुलासे के मुताबिक एप्पलबी और एशियासिटी की सेवाएं लेने वाली भारतीय कंपनियों में जीएमआर ग्रुप, जिंदल स्टील, हैवेल्स, हिंदुजा ग्रुप, अपोलो टायर्स, एम्मार एमजीएफ, वीडियोकॉन, डी एस कंस्ट्रक्शन और हीरानंदानी ग्रुप जैसे नाम शामिल हैं। जबकि अलग-अलग तरह की लेन देन के नेटवर्क में विमानन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा, बीजेपी के राज्यसभा सांसद आर के सिन्हा, एक्टर अमिताभ बच्चन, पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम, संजय दत्त की पत्नी मान्यता, फोर्टिस-एस्कॉर्ट्स के चेयरमैन डॉ अशोक सेठ, कॉरपोरेट लॉबीस्ट नीरा राडिया और कांग्रेस नेता सचिन पायलट का जिक्र भी मिलता है। विमानन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने कहा कि उन्होंने नियमों को तोड़ने वाला कोई काम नहीं किया है।


राज्यसभा सांसद आर के सिन्हा ने मौन व्रत के चलते कैमरे पर कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया है। लेकिन वो इसपर पहले ही सफाई दे चुके हैं कि कानून के हिसाब से उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है। इसमें जिनका नाम आया है उनमें से ज्यादातर लोग भी यही कह रहे हैं और आईसीआईजे ने भी कहा है कि इस काम में किसी कानून का उल्लंघन नहीं किया गया है। लेकिन विपक्ष इन खुलासों के बहाने सरकार को इससे पहले पनामा पेपर्स, स्विस बैंक लीक के मामलों की याद दिला रहा है और कह रहा है कालाधन के खिलाफ बोलने वाली सरकार खुलासों के बाद भी कार्रवाई करने से बचती है।  


सरकार ने सीबीडीटी चेयरमैन की अध्यक्षता में एक मल्टी एजेंसी ग्रुप बना दिया है जो जांच की मॉनिटरिंग करेगा। लेकिन सवाल है कि जब कोई कानून टूटा ही नहीं तो जांच में हासिल क्या होगा? लेकिन उससे भी बड़ा सवाल ये है कि कानून में ऐसे छेद क्यों छोड़े गए हैं जो विदेशों की सैर कराकर काला धन को सफेद करने का रास्ता खोलते हैं?