Moneycontrol » समाचार » बाज़ार खबरें

हवा में फिर घुला जहर, प्रदूषण रोकने के क्या होंगे उपाय!

प्रकाशित Tue, 07, 2017 पर 18:27  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

दिल्ली में दम घुटता है। जीहां इस वक्त दिल्ली की हवा अपने इतिहास में सबसे ज्यादा खराब है हालात ये हैं कि आईएमए ने दिल्ली में हेल्थ इमरजेंसी का एलान कर दिया है, हवा इतनी ज्यादा खराब है कि ये खतरनाक के स्तर को पार कर गई है और दिल्ली में सांस लेने वाले हर आमो खास की सेहत अब दांव पर है। लेकिन आखिर क्यों दिल्ली की ये हालत हुई। इतने शोर-शराबे के बावजूद भी दिल्ली की हवा को जहरीली होने से क्यों नहीं बचा पाए हम, ये किसका काम है और कौन इसके लिए जिम्मेदार इसी पर है।


दिल्ली में एक बार फिर सबकुछ धुआं धुआं है और प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। इसको लेकर एनजीटी ने दिल्ली, यूपी और हरियाणा सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। पर्यावरण से जुड़े एक एनजीओ ने कहा है कि ये दिल्ली में स्मॉग से हालात खराब है तो वहीं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने दिल्ली में हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दी है। केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड का मानना है कि अगले कुछ दिनों तक दिल्ली के हालात ऐसे ही रहेंगे। प्रदूषण को देखते हुए दिल्ली में स्कूलों को बंद करने की भी तैयारी है। मुख्यमंत्री केजरीवाल ने शिक्षामंत्री सिसोदिया को स्कूल बंद करने को कहा।


वहीं ईपीसीए यानि एनवायरॉनमेंट पॉल्यूशन एंड कंट्रोल अथॉरिटी का कहना है कि अगर प्रदूषण के हालात दिल्ली में और खराब होते हैं तो पार्किंग की फी चार गुना तक बढ़ा देनी चाहिए। सरकार को इस बारे में जल्द फैसला लेना चाहिए। वहीं मेट्रो किराए में कमी करने का सुझाव भी ईपीसीए ने दिया है।


एयर क्वालिटी इंडेक्स को देखे तो शुक्रवार को दिल्ली में एयर क्वालिटी इंडेक्स 324, शनिवार को 351, रविवार को 368 और मंगलवार को 600+ चला गया है।


वर्तमान हालात के मद्देनजर उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर गठित पर्यावरण प्रदूषण रोकथाम एवं नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसी) द्वारा ग्रेडेड रेस्पांस एक्शन प्लान (जीआरएपी) के तहत तय उपाय इस्तेमाल में लाए जा सकते हैं जिसमें पार्किंग शुल्क को चार गुना बढ़ाया जाना शामिल है। अगर स्थिति और खराब होती है और कम से कम 48 घंटों तक बनी रहती है तो जीआरएपी के तहत आने वाला कार्यबल स्कूलों को बंद कर सकता है और सम-विषम ऑड-ईवन योजना को फिर शुरू कर सकता है।


पिछली बार हवा की गुणवत्ता दीपावली के एक दिन बाद 20 अक्टूबर को बेहद गंभीर स्थिति में पहुंची थी। तब से प्रदूषण के स्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और हवा की गुणवत्ता काफी खराब स्तर पर बनी हुई है। यह अत्यंत गंभीर से बेहतर स्थिति है लेकिन वैश्विक मानकों के मुताबिक यह भी खतरनाक है।


वहीं सेंटर फॉर साइंस एनवायरॉनमेंट की डायरेक्टर सुनीता नारायण का कहना है कि प्रदूषण कम करने के लिए पार्किंग फीस बढ़ाई जा सकती है लेकिन सरकार को पहले पब्लिक ट्रांसपोर्ट को दुरुस्त करना होगा।