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आवाज अड्डाः जीएसटी दरों में बड़ा बदलाव, गुजरात चुनाव बना बड़ा फैक्टर!

प्रकाशित Fri, 10, 2017 पर 20:49  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

जीएसटी काउंसिल ने होटल-रेस्टोरेंट क्षेत्र की दरों में बड़े बदलाव किए हैं। 200 से ज्यादा चीजों की दरें कम की हैं और कंपोजिशन स्कीम का दायरा बढ़ा दिया है। मतलब कंज्यूमर और कारोबारी दोनों को राहत देने वाले फैसले किए गए हैं। यहां तक कि कंपोजिशन में बदलाव के लिए सरकार जीएसटी एक्ट में भी बदलाव करेगी। जीएसटी लागू होने के चार महीने बाद इतने बड़े बदलावों के कई मायने निकाले जा सकते हैं। मसलन, क्या सरकार ने जल्दबाजी में बारीकियों की अनदेखी की, जो अब समझ में आ रही हैं?


माना जा रहा था कि कंप्लायंस बढ़ेगी तो राज्यों के कंपनसेशन का सवाल नहीं रहेगा। लेकिन 5 राज्यों को छोड़कर बाकी राज्य कंपनसेशन की मांग कर रहे हैं। अब दरों में कटौती से राजस्व और घटेगा तो कंपनसेशन का सवाल भी गहरा हो गया है। इस तरह के तमाम सवालों पर आज अड्डा में चर्चा करेंगे।


जीएसटी को लागू हुए चार महीने बीत चुके हैं। इन चार महीनों में जीएसटी में कई तरह के फेरबदल किए गए। लेकिन आज काउंसिल की बैठक में जीएसटी में अब तक के सबसे बड़े फेरबदल पर सहमति बन गई है। आम लोगों को राहत देने के लिए 28 फीसदी स्लैब में 177 आइटम्स पर अब 18 फीसदी जीएसटी लगेगा। इसके अलावा कई आइटम्स पर जीएसटी 18 फीसदी से घटाकर 12 और 5 फीसदी कर दिया गया है। जीएसटी दरों में किए गए बदलाव 15 नवबंर से लागू होगें।


रेस्टोरेंट और होटल इंडस्ट्री को सरकार की ओर से बड़ी राहत दी गई है। रेस्टोरेंट और होटल पर 5 फीसदी जीएसटी लगेगा। रेस्टोरेंट, होटल को इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिलेगा। हालांकि 7500 रुपये प्रति दिन किराए वाले होटलों पर 18 फीसदी जीएसटी वसूली जायेगी और इन 18 फीसदी जीएसटी वाले होटलों को टैक्स क्रेडिट मिलेगा।


सरकार ने कम्पोजीशन स्कीम के कारोबारियों को राहत दी है। कम्पोजीशन स्कीम का दायरा 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये किया गया है। इतना ही नहीं कारोबारियों को अब सिर्फ 3 महीने में एक बार ही जीएसटीएनआर-1 भरना होगा।


चॉकलेट, चुइंग गम, शैम्पू, वॉशिंग पाउडर, फर्नीचर, मेकअप आइटम, मार्बल, ग्रेनाइट, शेविंग क्रीम, बिजली के सामान और सैनिटरी आइटम पर जीएसटी 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी किए जाने पर सहमति बनी है।


खाजा, अनारसा, चिक्की पर 18 फीसदी जीएसटी दरें घटाकर 5 फीसदी की गई है जबकि पास्ता, कॉटन, जूट हैंडबैग पर जीएसटी 12 फीसदी तय की गई है। फ्लाई ऐश, फ्लाई ऐश ब्रिक पर 18 फीसदी से घटकर 5 फीसदी तय किया गया है। अब केवल 50 फीसदी आइटमों पर ही 28 फीसदी जीएसटी लगेगा।


जीएसटी की दरें घटाने पर काउंसिल की बैठक में शामिल बिहार के वित्त मंत्री सुशील मोदी ने कहा कि जीएसटी की दरों में कमी से राजस्व में सालाना 20,000 करोड़ रुपये की कमी आएगी। लेकिन, टैक्स संग्रह की स्थिति को ठीक किया जा सकता है और इससे राजस्व में अंतर को कम कर सकते हैं।


वहीं जीएसटी पर बात करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि जरूरी आइटमों पर जीएसटी दरें घटाईं गई है। हालांकि इससे केंद्र को 60,000 करोड़ रुपये और राज्यों को 30,000 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा होगा। उन्होंने आगे कहा कि 2 आइटम को 28 फीसदी से घटाकर 12 फीसदी में लाया गया जबकि 8 आइटम को 12 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी में लाया गया है। वहीं 6 आइटम को 5 फीसदी से घटाकर नो जीएसटी दायरे यानि 0 फीसदी में लाया गया जबकि 13 आइटम को 18 फीसदी से घटाकर 12 फीसदी में लाया गया है। रिटर्न फाइलिंग की तारीख बढ़ी है। अब 31 मार्च तक रिर्टन फाइल कर सकते हैं। जीएसटीआर-2 की समीक्षा के लिए कमिटी का गठन किया जायेगा।


चार महीनों में जीएसटी में कई तरह के फेरबदल किए गए जाने के बाद सवाल यह उठता है कि क्या मोदी सरकार गुजरात चुनाव को देखते हुए जीएशटी में बड़े बदलाव कर रही है? या असल में दिक्कतों को देखते हुए इन बड़े फेरबदल की जरूरत थी? साथ ही दरों में कटौती से राजस्व नुकसान की भरपाई कैसे होगी? और क्या सरकार जीएसटीएन इंफ्रास्ट्रक्टर के सबसे बड़े चैलेंज को दूर कर पाएगी?