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शेल कंपनियों ने बढ़ाई सरकार की मुश्किल

प्रकाशित Mon, 13, 2017 पर 13:50  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

शेल कंपनियों पर एक्शन लेने में कॉरपोरेट अफेयर्स मंत्रालय को खासी मुश्किल हो रही है। सूत्रों के मुताबिक डीलिस्ट की गई करीब 2.25 लाख कंपनियों में से मात्र 93,000 कंपनियों के पास ही पैन कार्ड था। यानि बाकी कंपनियों का पता लगाना लगभग नामुमकिन है।


सूत्रों का कहना है कि 2013 में कंपनियों के पैन जरूरी किया गया था, जबकि 2013 से पहले कंपनी खोलने के लिए पैन जरूरी नहीं था। डीलिस्ट हुई कंपनियों में 1.3 लाख कंपनियों का पैन नहीं है, जबकि एक ही पते पर कई कंपनियां रजिस्टर्ड हैं। चेन्नई के 1 कमरे पर 437 कंपनियां रजिस्टर्ड होने की बात सामने आई है। कंपनियां ऑफिस बंद कर गायब हो गई हैं और अभी तक कंपनियों का कोई सुराग नहीं मिल सका है।


सरकार को बैंकों से भी जानकारी लेने में मशक्कत करनी पड़ रही है। बैंक अभी तक सभी कंपनियों के खातों का रिकार्ड भी मंत्रालय को उपलब्ध नहीं करा सके है। कॉरपोरेट ऑफेयर मंत्री ने बैंकिंग अधिकारियों और कंपनियों के रजिस्ट्रार के साथ 15 नवंबर को बैठक भी बुलाई है। लेकिन जानकारी के अभाव में सरकार के लिए शेल कंपनियों पर कार्रवाई कर पाना आसान नहीं है।