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डिजिटल इंडिया में बढ़ता साइबर अटैक का खतरा

प्रकाशित Mon, 13, 2017 पर 14:11  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

साइबर सुरक्षा जो पहले मात्र जरूरत होती अब सबसे ज्यादा जरूरी हो गई है क्योंकि जैसे जैसे देश डिजिटल होता जा रहा वैसे वैसे साइबर सुरक्षा को लेकर चिंता भी बढती जा रही है। जानकारों का कहना है कि साइबर सुरक्षा को हमेशा बेहतर करना जरूरी है।


भारतीय रिजर्व बैंक नें बैंकों और वित्तीय संस्थानों को कहा है कि हर तिमाही अपडेट दें ताकि साइबर खतरों के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी इकट्ठा की जा सके। पिछले महीने, आरबीआई ने यस बैंक पर 6 करोड़ रुपये जुर्माना लगाया था क्योंकि वो ये रिपोर्ट जमा नही कर पाए थे। आरबीआई ने साइबर सुरक्षा पर एक इंटर-डिस्पिलिनरी स्टैंडिंग कमिटी भी बनाई है।


सीआईआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस क्षेत्र के 40 फीसदी कारोबार पर कम से कम एक बार हमला हो चुका है। पिछले तीन सालों में क्रेडिट और डेबिट कार्ड धोखाधड़ी मामलों में छह गुना वृद्धि हुई है। चिंता की बात ये है कि इसे रोकने के लिए जानकार लोगों की भारी कमी है।


सरकार भी इस चिंता से इत्तेफाक रखती है। डाटा को सुरक्षित रखने के लिए आईटी मंत्रालय ने जुलाई में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज बीएन कृष्णा की अध्यक्षता में एक कमिटी का गठन भी किया है। अगले साल मार्च में इसे लेकर नया कानून लाने की तैयारी है।


इस साल मोबाइल धोखाधड़ी में 60-65 फीसदी बढ़ोतरी होने की आशंका है, जो बेहद खतरनाक है। फिलहाल मोबाइल पर 40-45 फीसदी वित्तीय लेनदेन किए जा रहे हैं। जानकारों का मानना है कि पहले हैकिंग एक शौक हुआ करता ता जो अब कारोबार का आकार ले चुका है। लिहाजा ये जरूरी है कि हम लोग हमेशा सावधान रहें क्योंकि साइबर सुरक्षा की सबसे कमजोर कड़ी हम लोग ही हैं।