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आवाज अड्डाः दिल्ली के प्रदूषण पर राजनीति, क्या होगा एक्शन प्लान!

प्रकाशित Mon, 13, 2017 पर 20:48  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

दिल्ली में इस साल भी जहरीली हवा आकर बैठ गई है। लेकिन आपको याद होगा कि प्रदूषण का भयावह रूप सामने आने से पहले ही इसपर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया था। सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों की बिक्री क्या रोकी, धर्म को जोड़कर बहस शुरु हो गई। और अब हालत ये है कि एक तरफ तो बच्चों के स्कूल बंद करने पड़ रहे हैं, कंस्ट्रक्शन पर रोक है, पानी का छिड़काव किया जा रहा है, पार्किंग शुल्क बढ़ाए जा रहे हैं, ऑड-इवन का फॉर्मूला फिर से लाया जा रहा है। और दूसरी तरफ दिल्ली सरकार हरियाणा, पंजाब और केंद्र की सरकार पर समस्या की अनदेखी का आरोप लगा रही है तो हरियाणा सरकार दिल्ली सरकार से पराली जलाने का हिसाब मांग रही है।


कांग्रेस के सांसद दीपेंद्र हूडा राजनीति से ऊपर उठने और प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में समिति बनाने की मांग कर रहे हैं तो कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी प्रदूषण पर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर चुटकी ले रहे हैं। इस बीच नेशलन ग्रीन ट्रिब्यूनल दिल्ली सरकार से पूछ रहा है कि क्या किया जा रहा है तो सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और संबंधित राज्यों को नोटिस जारी कर दिया है।


सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब की सरकारों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण के उपाय लागू करने के लिए दायर याचिका पर ये नोटिस जारी किया है। इधर दिल्ली सरकार ने एनजीटी से गुजारिश की है कि ऑड-इवन लागू करने में महिलाओं और दोपहिया वाहनों को छूट दी जाए ताकि इसे व्यावहारिक तौर पर लागू किया जा सके।


पिछले सप्ताह दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने हरियाणा और पंजाब के मुख्यमंत्रियों से मुलाकात के लिए पत्र लिखा था, ताकि पराली जलाने को लेकर बातचीत की जाए। इसपर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने केजरीवाल को पत्र लिखकर पूछा है कि दिल्ली में पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए क्या किया गया है। जवाब में आम आदमी पार्टी ने हरियाणा, पंजाब और केंद्र पर जिम्मेदारी से भागने का आरोप लगाया है।


जबाव में बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा ने केजरीवाल सरकार से प्रेस में बयानबाजी करने के बजाए काम पर ध्यान देने की नसीहत दी है। 


इधर कांग्रेस उपाध्यक्ष ने दिल्ली के प्रदूषण से संबंधित एक खबर को ट्वीट करते हुए प्रधानमंत्री पर चुटकी ली है। राहुल ने लिखा है कि सीने में जलन, आँखों में तूफ़ान सा क्यों है, इस शहर में हर शख़्स परेशान सा क्यों है? क्या बताएँगे साहेब, सब जानकर अंजान क्यों हैं? जबकि सांस लेने के अधिकार पर बिल लाने की बात कर रहे सांसद दीपेंद्र हूडा ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर उत्तर भारत के राज्यो के मुख्यमंत्रियों के साथ एक समिति बनाने की मांग की है ताकि राजनीति से ऊपर उठकर प्रदूषण की समस्या का स्थायी सामाधान निकाला जाए।


सवाल उठता है कि अगर सब अपनी-अपनी राजनीति करते रहेंगे तो राजनीति से ऊपर उठने की बात के क्या मायने हैं? क्या  दिल्ली को जहरीली हवा से मुक्ति दिलाना सरकार की जिम्मेदारी नहीं है? आखिर दिल्ली वालों बेखौफ सांस लेने का अधिकार कब मिलेगा?