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जीएसटी इफेक्ट: गार्मेंट एक्सपोर्टर्स की मुश्किल बढ़ी

प्रकाशित Sat, 02, 2017 पर 16:48  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सरकार चाहे रिफॉर्म को लेकर कुछ भी कहें, मगर हकीकत ये भी है कि जीएसटी के बाद नोएडा के गार्मेंट एक्सपोर्टर्स की कमर टूट गई है। दरअसल ड्यूटी ड्रॉबैक स्कीम में 6 फीसदी कटौती के बाद एक्सपोर्टर्स को मुनाफे की जगह घाटा हो रहा है। इसकी वजह से करीब 800 गार्मेंट यूनिट्स बंद हो चुके हैं और यहां हजारों मजदूर अपनी नौकरी गंवा चुके हैं।


लोगों की परेशानियों की वजह है नोएडा में बंद पड़ी फैक्ट्रियां। नोएडा सेक्टर-63 में स्थित इस फैक्ट्री में पहले 200 सिलाई मशीनों की गड़गड़ाहट गूंजती थी। रोजाना 200 कर्मचारी दिन में करीब 2500 पीस तैयार करते थे। लेकिन आज 45 दिन बीत चुके हैं और फैक्ट्री ठप पड़ी है। बीस साल से इस फैक्ट्री को चलाने वाले अनिल पेशावरी परेशान हैं।


नोएडा के सेक्टर 65 में इस फैक्ट्री का भी बुरा हाल है। इस फैक्ट्री में काम करने वाले 1,400 लोग रातों रात बेरोजगार हो गए क्योंकि ऑर्डर नहीं मिलने की वजह से फैक्ट्री बंद करनी पड़ी। फैक्ट्री के ऑपरेशन हेड समीर इस बात से चिंतित हैं कि अब फैक्ट्री को फिर से कैसे शुरू किया जाए। दरअसल जीएसटी लागू होने के बाद सरकार ने एक्सपोर्टर्स को मिलने वाली ड्यूटी ड्रॉबैक स्कीम में 6 फीसदी कटौती कर दी थी। सालाना टर्नओवर के हिसाब से जीएसटी से पहले एक्सपोर्टर्स को 4 फीसदी का प्रॉफिट मार्जिन मिलता था जो अब 6 फीसदी के घाटे में बदल गया है। इससे कारोबार करना मुश्किल हो गया है।


नोएडा-ग्रेटर नोएडा में कपड़ा कारोबारियों के करीब 2000 यूनिट्स है। इनमें से 40 फीसदी यूनिट्स इसी तरह बंद है। एक अंदाजे के मुताबिक इसके चलते 5 लाख लोग बेरोजगार हो गए हैं और सरकार ने जल्द कदम नहीं उठाया तो अगले 6 महीने में यह आंकडा 60 लाख तक पहुंचने का डर है।