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आवाज़ अड्डा: क्या कांग्रेस पूरा कर पाएगी घोषणापत्र के वादे

प्रकाशित Tue, 05, 2017 पर 09:46  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

कांग्रेस ने गुजरात के वोटरों से वादा किया है कि सरकार बनने पर डीजल, पेट्रोल के दाम में 10 रुपये की कटौती की जाएगी। किसानों का कर्ज माफ किया जाएगा, बिजली का बिल आधा कर दिया जाएगा। बेरोजगारों को हर महीने 4000 रुपये का भत्ता मिलेगा, महिलाओं को सब्सिडी पर घर दिया जाएगा, छोटे कारोबारियों को जीएसटी से छूट मिलेगी और ओबीसी, एससी, एसटी के कोटे में छेड़छाड़ किए बगैर पाटीदारों को स्पेशल कैटेगरी में आरक्षण दिया जाएगा।


कांग्रेस आरक्षण का वादा कैसे निभाएगी - ये पहेली अब तक सुलझी नहीं है। लेकिन समझौते के मुताबिक मैनिफेस्टो में आरक्षण की बात आने से हार्दिक पटेल को ताकत मिलेगी। शनिवार को पहले चरण का मतदान है। राजकोट की रैली में हार्दिक कांग्रेस का समर्थन करने की अपील कर चुके हैं। अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या हार्दिक पटेल पाटीदारों को कांग्रेस के पक्ष में गोलबंद करने में सफल होंगे या मोदी पुराने सबंधों का हवाला देकर पाटीदारों के वोट बचा पाएंगे।


कांग्रेस के लिए घोषणापत्र में पाटीदार आरक्षण का वादा करना, भविष्य में गले की हड्डी बन सकती है। अब तक हार्दिक अपनी सभाओं में यही कहते आ रहे हैं कि आरक्षण या पाटीदारों के वाजिब हक के सवाल पर बीजेपी बात करने के लिए भी तैयार नहीं है, जबकि कांग्रेस ने कम से कम एक सर्वे कराने और आरक्षण का तरीका ढूंढने का आश्वासन तो दिया है। अब तक बीजेपी का समर्थन करते रहे पाटीदार समुदाय से वो बीजेपी को एक बार ताकत दिखाने का आह्वान भी करते हैं। अब, घोषणापत्र में आरक्षण का उल्लेख हार्दिक पटेल को कांग्रेस के लिए समर्थन मांगने के आधार को और मजबूत करेगा।


इधर बीजेपी पाटीदारों को कांग्रेस के केएचएएम - यानि क्षत्रिय, हरिजन, आदिवासी और मुस्लिम का फॉर्मूला याद दिला रही है, जिसमें पाटीदार शामिल नहीं हैं। पार्टी ना सिर्फ कांग्रेस पर समाज को जाति के नाम पर बांटने का आरोप लगा रही है, बल्कि उसके सहयोगियों यानि अल्पेश ठाकोर और हार्दिक पटेल जैसे युवा नेताओं को अराजक भी बता रही है।


सवाल उठता है कि क्या आरक्षण का वादा मिल जाने भर से गुजरात के पाटीदार हार्दिक का कहना मानेंगे और कांग्रेस को एकमुश्त वोट देंगे? क्या कांग्रेस को गुजराती अस्मिता और पाटीदारों का दुश्मन बताने की मोदी की युक्ति काम करेगी? क्या इस बार गुजरात के पाटीदारों के वोट बंट भी सकते हैं? और सबसे बड़ा सवाल कि पहले चरण में पाटीदार फैक्टर के अलावा गुजरात में और किन मुद्दों का असर पड़ेगा?