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आवाज़ अड्डाः गरमाया राम मंदिर का मुद्दा, किसे होगा फायदा!

प्रकाशित Thu, 07, 2017 पर 09:34  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

धर्म और मंदिर का मसला तो गुजरात चुनाव में पहले से चल रहा था, लेकिन अब अयोध्या में राम मंदिर के मुद्दे ने भी चुनाव दंगल में एंट्री मार ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल की उस दलील पर कांग्रेस को घेरा है जिसमें सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से राम मंदिर पर सुनवाई लोकसभा चुनाव के बाद कराने की मांग की थी। मोदी कह रहे हैं कि चुनावी राजनीति की वजह से कांग्रेस मंदिर बनाने के रास्ते में रोड़े अटकाती रही है। कई राजनीतिक विश्लेषक मानने लगे हैं कि राहुल गांधी गुजरात में सॉफ्ट हिंदुत्व के एजेंडे पर चल रहे हैं। लेकिन कपिल सिब्बल की दलील ने कांग्रेस के मंदिर मुद्दे पर बैकफुट पर ला दिया है।


पीएम मोदी ने कहा सुप्रीम कोर्ट में आप दूसरे वकीलों की दलील कीजिए ना भाई। संविधान की बात बताइये। लोकसभा का चुनाव है इसलिए वक्फ बोर्ड चुनाव लड़ रहा है क्या? कांग्रेस बोल रही है कि कपिल सिब्बल के व्यक्तिगत विचार हैं। क्या वक्फ बोर्ड चुनाव लड़ रहा है? चुनाव लड़ने का विचार का क्या वक्फ बोर्ड का है? चुनाव कांग्रेस लड़ रही है। और आपको लग रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के अंदर राम मंदिर का जो भी निर्णय हो, उसकी वजह से उनको राजनीतिक फायदा या नुकसान - उनको ये देखना है या भारत का भला हो ये देखना है?


सुप्रीम कोर्ट के सामने कपिल सिब्बल की दलील पर गुजरात की चुनावी सभा में प्रधानमंत्री मोदी का वार। आरोप ये कि कांग्रेस राम मंदिर को चुनावी नफा-नुकसान की नजर से देखती है। प्रधानमंत्री का ये बयान कांग्रेस की इस सफाई के बाद आया है कि सुप्रीम कोर्ट में कबिल सिब्बल सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील की हैसियत बोल रहे थे, और पार्टी का इससे कोई लेना-देना नहीं है।


पीएम का तर्क ये है कि अगर अयोध्या विवाद से जुड़े सभी पक्ष जल्द फैसला चाहते हैं तो कपिल सिब्बल उसे क्यों उलझाए रखना चाहते हैं। वो भी 2019 के लोकसभा चुनावों तक। बाबरी मस्जिद एक्शन कमिटी के संयोजक जफरयाब जिलानी कपिल सिब्बल का समर्थन किया है लेकिन उससे पहले सुन्नी वक्फ बोर्ड के एक सदस्य ने ये कहकर कंफ्यूजन और बढ़ा दिया कि वो कपिल सिब्बल से सहमत नहीं और जल्दी फैसला चाहते हैं।


अब कांग्रेस कह रही है कि बतौर वकील सुप्रीम कोर्ट में कपिल सिब्बल की दलील को बीजेपी जबर्दस्ती चुनावी मुद्दा बनाने मे लगी है, क्योंकि उन्हें गुजरात चुनाव में कांग्रेस का डर सता रहा है और वो मुख्य मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाना चाहते हैं।


सवाल उठता है कि क्या कोर्ट में अयोध्या मामले के चुनावी मुद्दा बताकर कपिल सिब्बल ने कांग्रेस को फंसा दिया है? और मनमाफिक मौका मिलते ही बीजेपी ने राममंदिर का मुद्दा चुनाव के मंच पर रख दिया? और सबसे बड़ा सवाल कोर्ट में पेंडिंग राम मंदिर के मुद्दे का गुजरात चुनाव में किसको फायदा हो सकता है?