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मानसिक रोगी बना सकती है वीडियो गेम की लत

प्रकाशित Wed, 03, 2018 पर 09:25  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

जरूरत से ज्यादा ऑनलाइन या ऑफलाइन गेम खेलना एक मानसिक रोग भी हो सकता है। हाल ही में ब्लू व्हेल जैसे गेम्स की वजह से खुद को नुकसान पहुंचाने वाले कई मामले सामने आए। इसके बाद डब्ल्यूएचओ ने गेमिंग डिसऑर्डर को परिभाषित करने का फैसला किया है। इसके बाद तमाम देश गेमिंग के इस्तेमाल से जुड़ी पॉलिसी बना पाएंगे।


अगर आपके घर में कोई बच्चा जरूरत से ज्यादा ऑनलाइन या इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स पर गेम खेलता है तो सावधान हो जाइए। ये एक गेमिंग डिसऑर्डर या सरल भाषा में कहें तो एक मानसिक रोग हो सकता है। जी हां वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन यानि डब्ल्यूएचओ गेमिंग डिसऑर्डर को 2018 की मेंटल हेल्थ कंडीशंस में शामिल कर सकता है। डब्ल्यूएचओ ने इसके लिए प्रारंभिक मंजूरी दे दी है और दुनियाभर के प्रमुख चिकित्सा संस्थाओं और मनोचिकित्सकों से चर्चा का दौर भी शुरू हो चुका है।


दिल्ली स्थित एम्स के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. राजेश सागर का कहना है कि अगर कोई भी व्यक्ति जो एक सीमा से ज्यादा गेमिंग कर रहा है चाहे वह ऑनलाइन हो या ऑफलाइन हो और उससे उसके स्वास्थ्य पर उसकी दिन प्रति दिन की दिनचर्या पर उसकी पढ़ाई पर उसके ऑफिस के काम पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है वह खाना नहीं खा रहा है तो इसे डिसऑर्डर की श्रेणी में रखा जाएगा यह एक तरह का मानसिक रोग है यही वजह है डब्ल्यूएचओ ने इसे मानसिक रोगों के वर्गीकरण में शामिल करने का फैसला लिया है। यह देखना ज़रूरी है कि इसके लागू होने पर हर गेम खेलने वाले को मनिसिक रोगी न समझा जाए।


इससे पहले डब्ल्यूएचओ ने अंतर्राष्ट्रीय रोगों का वर्गीकरण 1990 में किया था। लेकिन ब्लू व्हेल जैसे गेम से कई मौतें या खुद को नुकसान पहुंचाने वाले मामले सामने आने के बाद प्रस्तावित वर्गीकरण को खास माना जा रहा है। डब्ल्यूएचओ के प्रस्तावित मसौदे में गेमिंग डिसऑर्डर को ऑनलाइन और ऑफलाइन श्रेणी में रखा गया है । इसमें गेम खेलने वालों के कई तरह के व्यवहारों को सूचीबद्ध किया गया है। इससे डॉक्टर ये तय कर पाएंगे कि किसी व्यक्ति का व्यवहार गंभीर स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में पहुंच गया है या नहीं। इसके अलावा गाइडलाइंस जारी होने के बाद सरकारें चाहें तो अपने स्तर पर गेमिंग डिसऑर्डर के लिए पॉलिसी लेकर आ सकती हैं।


सामान्य सीमा से ज्यादा किसी भी तरह की गेमिंग को डब्ल्यूएचओ ने डिसऑर्डर माना है। चाहे वह ऑफ़लाइन हो या ऑनलाइन। ऐसे में इस फैसले को लेकर कुछ देशों से विरोध के स्वर उठने लगे हैं।