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आवाज़ अड्डा: तीन तलाक पर क्यों बदला कांग्रेस का रुख!

प्रकाशित Thu, 04, 2018 पर 09:24  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

तीन तलाक बिल पर आज राज्यसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष, खासकर कांग्रेस के बीच जोरदार तकरार हुई। कांग्रेस बिल को सेलेक्ट कमिटी यानि चुने हुए सदस्यों की कमिटी को सौंपना चाहती है। लेकिन सरकार कह रही है कि लोकसभा मे बिल का समर्थन कर चुकी कांग्रेस अब बिल को लटकाना चाहती है जबकि कोर्ट के फैसले को पक्का करने के लिए तुरंत ये कानून बनाना जरूरी है। नौबत यहां तक आई कि विपक्ष ने इसी बात पर वोटिंग करवाने की मांग कर डाली कि बिल को सेलेक्ट कमिटी के पास भेजा जाए या नहीं। लेकिन डिप्टी चेयरमैन ने हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित कर दी। संसद सत्र के अब सिर्फ 2 दिन बाकी हैं। इसलिए सवाल ये है कि कहीं ये बिल लटक तो नहीं जाएगा? और इससे भी बड़ा सवाल ये कि क्या बिल के विरोध की वजह सिर्फ दिखावे की राजनीति है या इस बिल में वाकई कुछ चिंताजनक प्रावधान हैं, जिनमें संशोधन जरूरी है!


राज्यसभा में पहले तीन तलाक बिल पेश होने में इसलिए वक्त लगा क्योंकि महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव की हिंसा पर हंगामा होता रहा और जब कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने तीन तलाक बिल रखा, टीएमसी के सुखेंदु शेखर रॉय ने संशोधन प्रस्ताव के साथ ये मांग रख दी कि बिल को सेलेक्ट कमिटी के पास भेज दिया जाए। वैसे उन्होंने ये भी साफ किया कि बिल के खिलाफ नहीं, बल्कि इसके लागू होने से पहले इसकी संसदीय समीक्षा चाहते हैं।


इसके बाद कांग्रेस की तरफ से आनंद शर्मा ने भी इसी आशय का प्रस्ताव रखा और सेलेक्ट कमिटी के लिए विपक्ष के सदस्यों के नाम भी सुझाए। कांग्रेस की आपत्ति पति को जेल भेजने वाले प्रावधान पर है। लेकिन आनंद शर्मा ने सदन में साफ किया कि इस कानून का विरोध ना करते हुए भी वो सरकार के रबर स्टैंप की तरह काम नहीं कर सकते।


वहीं सरकार की तरफ से वित्त मंत्री और राज्यसभा में सदन के नेता अरुण जेटली ने कहा कि कोर्ट के फैसले को कानून रूप देने के लिए ये बिल जल्दी पास करना जरूरी है और कांग्रेस राज्यसभा में आकर अपने पुराने स्टैंड से पलट रही है।


सवाल उठता है कि क्या वाकई कांग्रेस सिर्फ ये दिखाने के लिए बिल को सेलेक्ट कमिटी के पास भेजना चाहती है कि वो मुसलमानों के मामले में बीजेपी का आंख बंद कर समर्थन नहीं कर रही है? और कारण चाहे जो भी हो, क्या राज्यसभा में सरकार के अल्पमत में होने के चलते ये बिल लटक जाएगा?