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महाराष्ट्र जातीय हिंसा, अभी नहीं बुझी आग

प्रकाशित Thu, 04, 2018 पर 16:19  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

भीमा कोरेगांव में भड़की जातीय हिंसा का बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। महाराष्ट्र से लेकर गुजरात और मध्यप्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। गुजरात के राजकोट शहर में प्रदर्शनकारियों ने सरकारी बस फूंक दी। वहीं प्रदर्शनकारियों ने जूनागढ़ में सोमनाथ नेशनल हाईवे को जाम कर दिया। दूसरी तरफ मध्य प्रदेश में भी बुरहानपुर में प्रदर्शनकारियों ने 12 बसों में तोड़फोड़ की। इतना ही नहीं रास्ते से गुजर रहे ट्रकों को भी निशाना बनाया गया है।


इस बीच गुजरात के दलित नेता और एमएलए जिग्नेश मेवाणी और जेएनयू स्टूडेंट लीडर उमर खालिद की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। दोनों के खिलाफ सर्च वारंट जारी कर दिया गया है। कोरेगांव में हेट स्पीच के लिए पहले ही दोनों के खिलाफ पुणे में एफआईआर दर्ज किया गया है।


उधर बवाल बढ़ते देख मुंबई पुलिस ने आज मुंबई में जिग्नेश मेवाणी और उमर खालिद की छात्र भारती सभा पर रोक दी। इसके बाद छात्र आंदोलन पर उतर आए हैं। मुंबई पुलिस और छात्र नेताओं के बीच कई जगहों पर झड़प भी हुई। पुलिस ने कई छात्र नेताओं को हिरासत में लिया है। छात्रों का आरोप है कि उनका कार्यक्रम शांतिपूर्ण था लेकिन पुलिस ने जानबूझ कर इजाजत वापस ले ली है। इस बीच पुलिस ने एहतियातन मुबंई के विले पार्ले इलाके में धारा 144 लागू कर दी है।


इस बीच महाराष्ट्र भीमा-कोरेगांव की जातीय हिंसा का मुद्दा आज भी राज्य सभा में उठा। विपक्षी सांसदों ने हिंसा को लेकर सरकार पर निशाना साधा। वहीं सरकार की तरफ से रामदास अठावले ने जवाब देते हुए कहा कि हिंसा को राजनीतिक नजर से नहीं देखना चाहिए। वहीं कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकारों में क्या अत्याचार नहीं होता था।


वहीं आज भीमराव अंबेडकर के पोते और और भारिप बहुजन महासंघ के अध्यक्ष  प्रकाश अंबेडकर ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस को दो मुख्य आरोपियों के बारे में बताया है। उन्होंने दो टूक कहा कि अगर सरकार कारर्वाई नहीं करती तो आगे अमन की गारंटी वो नहीं दे सकते।