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आवाज़ अड्डा: डिग्री पर भारी सरकारी नौकरी, चपरासी की नौकरी पर टूट पड़े इंजीनियर

प्रकाशित Sat, 06, 2018 पर 13:02  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

पिछले दिनों राजस्थान असेंबली के सेक्रेटेरिएट में चपरासी के 18 पदों के लिए बहाली हुई। इसके लिए 18,000 से ज्यादा आवेदन मिले लेकिन इंटरव्यू देने आए 12,453 लोग। आपको जानकार हैरान होगी कि इनमें से 129 इंजीनियर थे, 23 वकील थे, एक सीए था और 393 लोगों के पास पोस्ट ग्रैजुएट डिग्री थी। दिलचस्प बात ये है कि 15 दिसंबर को जब फाइनल रिजल्ट आया तो एक सीट एक बीजेपी विधायक के बेटे को मिल गई, जो कि 10वीं पास है।


कुल मिलाकर यहां चपरासी की नौकरी में इंजीनयर, वकील और एमए पास लोगों की होड़ मची और बाजी मार गया एक विधायक का दसवीं पास बेटा। 2016 में उत्तर प्रदेश में करीब 3,000 स्वीपर की भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई तो वहां भी 1 लाख 10 हजार अर्जियां मिलीं और उनमें भी एम. टेक और एमबीए जैसी डिग्रियों वाले लोगों की अर्जियां मिलीं। सवाल उठता है कि देश के नौजवानों का ये हाल क्यों है और सरकारी नौकरी में ऐसा क्या है कि बड़ी-बड़ी डिग्री वाले भी खिंचे चले आते हैं। आवाज़ अड्डा में इसी पर की गई चर्चा।


दरअसल सरकारी नौकरी को लेकर लोगों के मन में कई गलतफहमियां हैं। लोगों का मानना है कि सरकारी नौकरी में काम कम होता है और तनख्वाह ज्यादा होती है। इसके अलावा सरकारी नौकरी में दबाव नहीं होता, फायदे खूब रहते हैं और नौकरी को खतरा नहीं रहता। बताना चाहेंगे कि सरकारी नौकरी शुरू में फायदेमंद लगती है, लेकिन आगे समय के साथ सीमित तरक्की ही संभव है। वहीं प्राइवेट नौकरी में तरक्की की सीमा नहीं है, ऐसे में सरकारी नौकरी में 10-15 साल बाद योग्य लोगों को निराशा का सामना करना पड़ता है। अब सरकारी नौकरियां भी करार पर दी जाने लगी हैं और सरकारी नौकरियों में भी टार्गेट पर जोर दिया जा रहा है। सरकारी नौकरी की सुरक्षा कम हो रही है।


एक सच्चाई यह भी है कि देश में बेरोजगारों की बड़ी लंबी फौज तैयार हो गई है। यूएन लेबर रिपोर्ट के मुताबिक 2016 में भारत में 1.77 करोड़ युवा बेरोजगार थे, जबकि 2017 में युवा बेरोजगारों की संख्या 1.8 करोड़ तक रहने का अनुमान है। 2017-18 में बेरोजगारी दर 3.4 फीसदी रहने का अनुमान है। देश की 65 फीसदी आबादी 35 से कम उम्र की है और वर्क फोर्स में सालाना 1 करोड़ की वृद्धि हो रही है। माना जा रहा है कि सरकार राष्ट्रीय रोजगार नीति ला सकती है और बजट 2018 में विस्तृत नीति संभव है।


गौरतलब है कि केंद्र और राज्यों में 20 लाख से ज्यादा सरकारी पद खाली हैं। केंद्र सरकार में 36.50 लाख स्वीकृत पद हैं, जबकि 2017 जुलाई में 4.20 लाख पद खाली हुए हैं। रेलवे में 2.4 लाख पद खाली पड़े हैं, ईएसआईसी में डॉक्टर और नर्सों के 62 फीसदी पद खाली हैं। पुलिस और प्रारंभिक शिक्षा में 5 लाख पद खाली हैं। यूपी में पुलिस के 1.60 लाख और आंगनबाड़ियों के 2 लाख पद खाली हैं।