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आवाज़ आंत्रप्रेन्योरः किराए पर साइकिल का बिजनेस

प्रकाशित Sat, 13, 2018 पर 14:31  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

इको फ्रेंडली बनने की राह पर निकल पड़े हो या तंग गलियों से गुजरकर दफ्तर या स्कूल, कॉलेज पहुंचने की जल्दी हो। साइकल पर सफर हमेशा ही सस्ता और मजेदार होता है। साइकल चलाना किसी की मजबूरी होती है तो किसी की पसंद।


दिल्ली के आकाश गुप्ता के सामने दोस्त रिश्तेदारों ने अपने साइकल चलाने के अनुभव को सांझा किया तो आकाश के सामने चमका साइकिल शेयरिंग बिजनेस का आइडिया। और देखते ही देखते 2017 में उनके स्टार्टअप मोबाइसी ने आकार लिया। साइकिल शेयरिंग को आज के माहौल में ढालने के लिए उन्होंने मोबाईसी को ऐप से जोड़ कर आगे बढ़ने का फैसला किया।


मोबाईसी डॉक्लेस साइकिल शेयरिंग प्लेटफॉर्म है, जो ऐप के जरिए काम करता है। ऐप पर मौजूद मैप पर आप के इलाके में उपलब्ध साइकिल को ढूंढा जा सकता है।  साइकिल पर दिए गए क्यूआर कोड को ऐप में स्कैन करते  ही साइकिल अनलॉक हो जाती है। राइड खत्म करने के लिए साइकिल को लॉक करना होता है, जहां से दूसरे राइडर के इस्तेमाल के लिए छोड़ा जाता है। हर एक घंटे के लिए राइडर को 10 रुपए और 500 से 1000 रुपये तक का रिफंडेबल सिक्योरिटी डिपॉडिट चुकाना होता है। ये सभी पेमेंट ऐप के जरिए ही होती है। सिक्योरिटी के लिए साइकिल को जीपीएस जैसे फीचर्स से लैस किया गया है।


मोबाइसी की शुरुआत 25 लाख के निवेश से हुई और कंपनी ने हाल ही में 0.5 मिलियन यानि करिब 3 करोड़ की सीड फंडिंग भी जुटाई है। निवेश का  बड़ा हिस्सा साइकल पर खर्च होता है। साथ ही फाउंडर ने एक मजबूत टीम बनाने पर भी काफी समय और ध्यान दिया है। मोबाइसी का कारोबार सब्सक्रिप्शन मॉडेल पर काम करता है। कंपनी हर राइड और मासिक स्ब्सक्रिप्शन के जरिए ही रेवेन्यू कमाती है। कंपनी का मानना है कि अकेले राइड से मिली राशी से ही साइकल की लागत चुकाई जा सकती है।
 
फिलहाल माबोइसी, दिल्ली, गुणगांव और फरीदाबाद में मौजूद है। कंपनी अपने कारोबार को इस साल चंडिगढ़. पुने समेत 20 शेहरों में पहुंचाना चाहती है और अगले 6-9 महीने में मौजूदा 5000 साइकल के आंकड़े को 50,000 तक पहुंचाने का लक्ष्य रखती है।


मोबाइसी का लक्ष्य आने वाले एक से ढेड़ साल में कारोबार को एक बिलियन के आंकड़े तक पहुंचाने का है। इसे मुमकिन बनाने के लिए कंपनी यूनिवर्सिटी और कई राज्य सरकारों से जुड़ कर आगे बढ़ने की कोशिश कर रही है।


साइकल शेयरिंग के इस कारोबार में मोबाइसी, ट्रिंग ट्रिंग, ग्रीन राइड और नम्मा साइकल  जैसे स्टार्टअप्स के साथ ओला पेडल जैसे बड़े प्लेयर्स भी शामिल है।  पुणे नगर निगम ने इंटिग्रेटेड साइकल प्लान के जरिए साइकल के इस्तेमाल को 9 से 25 फीसदी तक पहुचाने का लक्ष्य रखा है। राज्यों के ऐसे कदम साइकल शेयरिंग की आदत और कारोबार दोनों को बढ़ावा दे रहे हैं। हर रोज बढ़ते प्रदूषण और ट्रैफिक के चलते ये इको फ्रेंडली तरीका ग्राहकों को कम्युटींग में राहत की राह पर ले जा रहा है।