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एमएसपी बढ़ाने से कितना होगा किसानों का फायदा!

प्रकाशित Fri, 02, 2018 पर 16:16  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लिए बजट में बड़े एलान किए जिसमें किसानों को उनकी फसल पर आने वाली लागत का 1.5 गुना एमएसपी बढ़ाकर देने की घोषणा भी शामिल है। लेकिन एमएसपी किस आधार पर तय किया जाएगा ये बड़ा सवाल है। चुनावी साल से पहले किसानों को लुभाने के लिए वित्त मंत्री ने बजट में एमएसपी 1.5 गुना बढ़ाने का एलान तो कर दिया लेकिन बड़ा सवाल ये है कि आखिर एमएसपी किस आधार पर तय किया जाएगा।


2006 में आई स्वामीनाथन कमीशन की रिपोर्ट के मुताबिक फसल पर आने वाली लागत 3 हिस्सों में बंटी होती है। पहले हिस्से में किसानों के फसल उत्पादन में किए गए सभी तरह के नकद खर्च शामिल होते हैं। दूसरे हिस्से में नकद खर्च के साथ परिवार के सदस्यों की मेहनत की अनुमानित लागत को भी जोड़ा जाता है। तीसरे हिस्से में फसल उत्पादन में नकद और गैर-नकद के अलावा जमीन पर लगने वाले लीज रेंट और अन्य कृषि पूंजियों पर लगने वाला ब्याज भी शामिल होता है। वित्त मंत्री ने सिर्फ एमएसपी बढ़ाने का एलान किया लेकिन किस लागत पर एमएसपी बढ़ेगी ये साफ नहीं है।


यही वजह है कि ज्यादातर किसान संगठन सरकार के इस एलान से नाखुश हैं। एक अनुमान के मुताबिक देश के सिर्फ 6 फीसदी किसानों को ही उनकी फसल पर एमएसपी मिल पाता है। बाकी किसानों की फसल बिचौलियों और साहूकरों के पास जाती है। ऐसे में वित्त मंत्री ने ये भी साफ नहीं किया है कि 94 फीसदी किसानों को एमएसपी दिलवाने के लिए क्या इंतजाम किए जाएंगे और उनकी खरीद को सरकारी खरीद केंद्रों में कैसे पहुंचाया जाएगा।


आपको बता दें कि 2017-18 में कृषि क्षेत्र के लिए 41886 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था जिसे बाद में बढ़ाकर 41105 करोड़ रुपये कर दिया गया था। इस बार आवंटन बढ़ाकर 46700 करोड़ रुपये किया गया है। यानी सिर्फ 4845 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी में किसानों की आय दोगुनी कैसी होगी।